शनिवार, 2 मई 2020

आओ फिर से दिया जलाएँ - अटल बिहारी वाजपेयी


आओ फिर से दिया जलाएँ
  भरी दुपहरी में अंधियाराा-
सूरज परछाई से हारा
 अंतरतम का नेह निचोड़ें- 
बुझी हुई बाती सुलगाएँ। 
आओ फिर से दिया जलाएँ
 हम पड़ाव को समझे मंज़िल
 लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
 वतर्मान के मोहजाल में- आने वाला कल न भुलाएँ। 
आओ फिर से दिया जलाएँ। 
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा अपनों के विघ्नों ने घेरा 
अंतिम जय का वज़्र बनाने- नव दधीचि हड्डियां गलाएँ। 
आओ फिर से दिया जलाएँ
अटल बिहारी वाजपेयी

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