रविवार, 17 मई 2020

उठो भइया उठो............(राजन विघार्थी)

         ए हाथ में एक कटोरी,ज्यों ही घुमायी उसने ठोढ़ी
हाथ किसी का उठ गया,वो भी खुशी से मुङ गया इससे पहले मुङ भी पाता ,तेजी से गिर गया
तेजी से फिर बोले साहब,ये तो साला मर गया  

अभी दिन नहीं अच्छे, प्रदेश में ...
हाथ एक न पैसा आया,बदले में थप्पड़ खाया

हाथ बढ़ा था अबभी उसका,पर अब होश नहीं था भीड़ खड़ी थी बहुत सी सारी ,
पर किसीको रोष नही था/

देश में 4 लाख से अधिक भिखारी, जानिए ...
इनसानियत ने अपना मुंह खोला
बड़ी सिद्दत से एक नवयुवक बोला
यह कल मरने वाली बुढ़िया का लाला था                                                             
थप्पड़ जिसने मारा मन्त्री जी का साला था
एक गरीबी उन्मूलन जलसे पे जा रहे हैं
सुना है कल लालपुर में,
गरीबों को खिचड़ी बटवा रहे हैं/
बिखरे पड़े थे उसके सिक्के
एक-एक,दो-दो के इक्के-दुक्के
भीड़ हट चुकी थी,कटोरी अब भी पड़ी थी
लड़का वहीं पड़ा था
पास में उससे भी छोटी लड़की खड़ी थी
सिसकीयों के साथ उठो भइया उठो......

कह रही थी//////////
राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है