पानी हूँ मैं,पानी हूँ मैं,पानी हूँ मे़ैं
अविरलता की एक कहानी हूँ मैं
हवा में हूं मैं,फिजा में हूं मै
समुद्र मे हूं मैं,आंख में हूं मैं
पानी हूं मैं,पानी पानी पानी
सारा जग ढूंढ रहा है पानी पानी पानी पानी.........
चट्टानों सा अडिग नही मैं
हवाओं सा चलित नही मैं
जब - जब मैं बहा वेग से
बड़ी-२ चट्टाने टूटी ,भांवनाओं की लहरे फूटीं
चलना मेरा काम है,इसलिए रूका नहीं मैं
गहराई मुझे बहुत पसन्द है
पर किसी के आगे झुका नहीं मैं./////
अविरलता की एक कहानी हूँ मैं
हवा में हूं मैं,फिजा में हूं मै
समुद्र मे हूं मैं,आंख में हूं मैं
पानी हूं मैं,पानी पानी पानी
सारा जग ढूंढ रहा है पानी पानी पानी पानी.........
चट्टानों सा अडिग नही मैं
हवाओं सा चलित नही मैं
जब - जब मैं बहा वेग से
बड़ी-२ चट्टाने टूटी ,भांवनाओं की लहरे फूटीं
चलना मेरा काम है,इसलिए रूका नहीं मैं
गहराई मुझे बहुत पसन्द है
पर किसी के आगे झुका नहीं मैं./////
राजन विघीर्थी
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