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मुकम्मल मेरा जहाँ है माँ यहाँ है माँ,वहाँ है माँ छोटी सी है दुनिया सारा जहाँ है माँ जहां हूँ मैं...
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पीड़ा मिली जनम के द्वारे अपयश नदी किनारे इतना कुछ मिल पाया एक बस तुम ही नहीं मिले जीवन में हुई दोस्ती ऐसी दु:ख से हर मुश्किल बन गई रुबाई,...
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बहुत दिनों बाद खुला आसमान! निकली है धूप, खुश हुआ जहान! दिखी दिशाएँ, झलके पेड़, चरने को चले ढोर--गाय-भैंस-भेड़, खेलने लगे लड़के छेड़-छे...