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शनिवार, 2 मई 2020

सुनो द्रोपदी -पुष्यमित्र उपाध्याय

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ...
छोड़ो मेहँदी खडग संभालो, खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे.
उठो द्रोपदी - कविता, Utho Dropadi Hindi Poems ...
कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए अखबारों से,
कैसी रक्षा मांग रही हो, दुशासन दरबारों से,
स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं, वे क्या लाज बचायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे.
सवाल आपसे ! क्या अब भी द्रौपदी की ...
कल तक केवल अँधा राजा, अब गूंगा बहरा भी है
होठ सी दिए हैं जनता के, कानों पर पहरा भी है,
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे, किसको क्या समझायेंगे?
SANJAY YADAV AMETHI's tweet - "उठो द्रौपदी वस्त्र ...उठो द्रोपदी वस्त्र संभालो अब ...
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे.
पुष्यमित्र उपाध्याय]