मेरे दिल की दीवारों को हिलाया है,
जब-जब तेरी यादों का जलजला आया है,
कुछ सवप्न खण्डहर हुए ,
कुछ अहसासों का मलबा निकला
नवनिर्माण को अपनों का फिर कुनबा निकला /
दिल की दीवारें कमजोर हैं
फिर भी यहां जलजले आते हैं
कभी उनकी यादें आती हैं
कभी वो खुद चले आते हैं/
वो जलजला सी मेरी जिन्दगी मे आती है
सारीरिक,मानसिक,आर्थिक,सामाजिक ढांचा
हिलाती है,
मैं मलबा समेटता रहता हूँ,
वो भाटा सी वापस चली जाती है//
राजन विघार्थी
27/07/17
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