गुलाल लगा कर भाग रहे थो,बच्चे खुल्लम- खुल्ला
चुुपके-चुपके पका रहीं थी,दादी माँ रसगुल्ला
सबकोइ भागम-भाग रहा था
कोइ सो रहा -कोइ जाग रहा था
न अम्मा ने रोका,न पापा ने टोॆका
जो मिल गया बस पिचकारी भोका
सब भाग-भाग रंग लगा रहे थे
देके इक दूजे को धोॆखा
इतनो में रसगुलले की खुसबू आयी
सबने घर की दौड़ लगायी
इस भाग दौड़ में,न हुई किसी की हार,न हुई किसी की जीत
बैठा देख रहा अभिजीत
फिर स्कूल शिवानी आयी,
भर कर टिफिन रसगुललेे लायी
सारे रसगुलले मैंडम खा गयीं
सर के हिस्से चासनी आयी
चुुपके-चुपके पका रहीं थी,दादी माँ रसगुल्ला
सबकोइ भागम-भाग रहा था
कोइ सो रहा -कोइ जाग रहा था
न अम्मा ने रोका,न पापा ने टोॆका
जो मिल गया बस पिचकारी भोका
सब भाग-भाग रंग लगा रहे थे
देके इक दूजे को धोॆखा
इतनो में रसगुलले की खुसबू आयी
सबने घर की दौड़ लगायी
इस भाग दौड़ में,न हुई किसी की हार,न हुई किसी की जीत
बैठा देख रहा अभिजीत
फिर स्कूल शिवानी आयी,
भर कर टिफिन रसगुललेे लायी
सारे रसगुलले मैंडम खा गयीं
सर के हिस्से चासनी आयी
दिल की बात बाइ राजन विघार्थी
written-11/03/2015
written-11/03/2015
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