जिसको उसने जन्म दिया
उसने उसको बाजार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला
जब जी चाहा दुत्कार दिया
कभी उसके जज्जबातों से खेला
कभी उसके जज्जबातों को मार दिया
कभी दुख,पीड़ा,बेबसी,बेचैनी दी
कभी-कभी तो प्यार दिया
कभी सती बता विधवा जला दिया
कभी भृूण में उसको मार दिया//
इसमे उसकी भी कुछ गलती थी
उसने माना किस्मत मे यही लिखा था
क्योंकी बचपन से उसने यही सिखा था
लाचार रहीं होंगी कुछ
कुछ ने खुद काला ईतिहास लिखा///
आंसू को हथियार बनाना था
बेटे को ढाल ,बेटी को तलवार बनाना था
क्यों विरोध नहीं किया उसने
जब आग में जलकर मरजाना था////
राजन विघार्थी
11/08/17
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