शनिवार, 16 मई 2020

गम कुछ ज्यादा रहा-राजन विघार्थी

1..वैसे तो
हर समस्या से जूझने का वादा रहा
कुछ किस्मत का ऐसा तगादा रहा
           जिन्दगी में
खुशियों की अपेक्छा गम कुछ ज्यादा रहा,/
2.वैसे तो जबभी गिरे सम्भलते रहे
संभल -२ मन्जिल की ओर चलते रहे
पैर व रास्तों का मेल रहा ऐसा की
हर मोड़ पर हम फिसलते रहे
हम प्यासे भटकते रहे कुए़ की तलाश में
लोग थे की बेवजह हमसे जलते रहे
भूखे -प्यासे कांपते कदमों से,
हम पथ पर अपने चलते रहे-चलते रहे चल ते,////

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