मैंने घेराबन्दी कर रक्खी है
तुम मुझे दगा नही दे सकती हो/
मैं प्यार का मरीज हूँ
मैं जिन्दगी चाहता हूँ
तुम मुझे मौत की दवा नहीं दे सकती हो/
मैं इकबाले जुर्म-ए इश्क
कबुल करता हूँ
तुम मुझे कोई और सजा दे सकती हो//
तू जलती आग है,
तुझसे नफरत का धुवाँ उठता है
और धुवें में मेरा दम घुटता है
मैं प्यार का मरीज जिन्दगी चाहता हूँ
तुम मुझे प्यार की हवा दे सकती हो////
राजन विघार्थी
28/04/17
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