आज अंधेरी गर्त में हूँ,एक रोज सवेरा होगा
'आज' किसीका हो सकता है ,एक रोज मेरा होगा
मन्जिल कदमों पर होगी,बुलन्द सितारा अपना होगा
धरती अपनी होगी,आसमान भी अपना होगा
ख्वाहिस फलीभूत होगी,पूरा हर सपना होगा
मेरी संकल्पों के आगे,हर असफलता को झुकना होगा
दुनिया को रेस के मैदान ,मेरे खातिर रूकना होगा
दुर्बलकाया के पदचिन्हों पर,अब शिंहासन को झुकना होगा
'आज' किसीका हो सकता है ,एक रोज मेरा होगा
मन्जिल कदमों पर होगी,बुलन्द सितारा अपना होगा
धरती अपनी होगी,आसमान भी अपना होगा
ख्वाहिस फलीभूत होगी,पूरा हर सपना होगा
मेरी संकल्पों के आगे,हर असफलता को झुकना होगा
दुनिया को रेस के मैदान ,मेरे खातिर रूकना होगा
दुर्बलकाया के पदचिन्हों पर,अब शिंहासन को झुकना होगा
राजन विघार्थ
०६/०४/२०१७
०६/०४/२०१७
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