कुछ अपने लगे हुए हैं,कुछ गैर लगे हुए हैं/
इश्क तो ऐसा चक्कर है,जिसमें सबके सब लगे हुए हैं //
कोई आंशिक्ता लगा हुआ है,कोई पूर्णकालिक लगा हुआ है/
प्यार के चक्कर में आजकल,हर गालिब लगा हुआ है//
कोई हार गया इसमें,कोइ मैदान मार गया इसमें/
कोई मैदान छोड़ के भागा हुआ है/
वो ले रहा है मजे जो है हर गालिब लगा हुआ/
कुछ हाथ डुबोये बैठ् हैं,कुछ पैर डुबोये बैठे हैं
कुछ इश्क के समन्दर में,अपनी लुटिया डुबोये बैठे़ं हैं/
इश्क तो ऐसा चक्कर है,जिसमें सबके सब लगे हुए हैं //
कोई आंशिक्ता लगा हुआ है,कोई पूर्णकालिक लगा हुआ है/
प्यार के चक्कर में आजकल,हर गालिब लगा हुआ है//
कोई हार गया इसमें,कोइ मैदान मार गया इसमें/
कोई मैदान छोड़ के भागा हुआ है/
वो ले रहा है मजे जो है हर गालिब लगा हुआ/
कुछ हाथ डुबोये बैठ् हैं,कुछ पैर डुबोये बैठे हैं
कुछ इश्क के समन्दर में,अपनी लुटिया डुबोये बैठे़ं हैं/
दिल की बात बाई (राजन विघार्थी
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