तितली सा रंग-बिरंगा होता
अपना प्यारा-न्यारा स्कूल
मम्मी सी मैडम होतीं
पापा से टीचर होते
सपनों से भी ज्यादा सुन्दर,तब अपने फीचर होते
रंग-बिरंगी किताबें होती, पढ़ना भी खेल होता
मैं इंजन बन जाता,बच्चों का रेल होता
मैडम डृाइवर बन जाती ,टीचर टीटी होते
हाथ फ्लैग बन जाते,मुंह अपने सीटी होते
छुक-छुक अपनी गाड़ी चलती,पों-पों हारन बजता
बात-बात पे पप्पी मिलती,जब कोई गलती करता
फिर सब कालेज को दौड़ लगाते
स्कूल से कोई न डरता
अभी तक तो ऎसा हुआ नही
काश कोई तो ऎसा करता///////////
अपना प्यारा-न्यारा स्कूल
मम्मी सी मैडम होतीं
पापा से टीचर होते
सपनों से भी ज्यादा सुन्दर,तब अपने फीचर होते
रंग-बिरंगी किताबें होती, पढ़ना भी खेल होता
मैं इंजन बन जाता,बच्चों का रेल होता
मैडम डृाइवर बन जाती ,टीचर टीटी होते
हाथ फ्लैग बन जाते,मुंह अपने सीटी होते
छुक-छुक अपनी गाड़ी चलती,पों-पों हारन बजता
बात-बात पे पप्पी मिलती,जब कोई गलती करता
फिर सब कालेज को दौड़ लगाते
स्कूल से कोई न डरता
अभी तक तो ऎसा हुआ नही
काश कोई तो ऎसा करता///////////
राजन विघार्थी
Written 11/03/15 to gullu gupta class ukg barra- kanpur nagar
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