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शनिवार, 2 मई 2020

खुला आसमान-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

INDIA 1976 SURYAKANT TRIPATHI NIRALA 1896-1961 MNH SINGLE STAMP ...
बहुत दिनों बाद खुला आसमान!
निकली है धूप, खुश हुआ जहान!
दिखी दिशाएँ, झलके पेड़,
चरने को चले ढोर--गाय-भैंस-भेड़,
खेलने लगे लड़के छेड़-छेड़--
लड़कियाँ घरों को कर भासमान!सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता ...
लोग गाँव-गाँव को चले,
कोई बाजार, कोई बरगद के पेड़ के तले
जाँघिया-लँगोटा ले, सँभले,
तगड़े-तगड़े सीधे नौजवान!
पनघट में बड़ी भीड़ हो रही,
नहीं ख्याल आज कि भीगेगी चूनरी,
बातें करती हैं वे सब खड़ी,
चलते हैं नयनों के सधे बाण!
निराला रचनावली 6 | Nirala Rachnawali ...

गीत गाने दो मुझे-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’


अब वेदना किससे कहूं – Arvind Pandey
गीत गाने दो मुझे तो,
वेदना को रोकने को।
Book review: The Outsider Inside | Lifestyle News,The Indian Express
चोट खाकर राह चलते
होश के भी होश छूटे,
हाथ जो पाथेय थे, ठग-
ठाकुरों ने रात लूटे,
सनातन मूल्यों और राष्ट्रवादी ...
कंठ रूकता जा रहा है,
आ रहा है काल देखो।
भर गया है ज़हर से
संसार जैसे हार खाकर,
Best Poems Of Suryakant Tripathi | Hindi Kahani | Kids Poetry In Hindi
देखते हैं लोग लोगों को,
सही परिचय न पाकर,
बुझ गई है लौ पृथा की,
जल उठो फिर सींचने को।
दुष्कर्म से पीड़ित नौ माह की गुड़िया ...

सरस्वती वंदना-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !
काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !