गुरुवार, 16 जून 2022

चाय

चाय....


एक छोटा सा शब्द चाय....कितना गहरा है ...कितना कुछ समेटे हुए हैं ..अपने में....इत्तु सी चाय ...बदल देती है दुनिया...  प्यार सम्मान अपनापन... स्नेह दुलार  मनुहार  एक मधुर अहसास ..सुकून... यारी दोस्ती...क्या कुछ नहीं है...चाय में....
सच कहूँ तो....एक कप चाय ...पूरी की पूरी महफिल है.... जिंदगी का सार है.... अब आप कहेंगे ...जिन्दगी का सार.... हाँ ...सार.. पी कर तो देखिए ..एक कप चाय दोस्तों संग... उस अहसास से लबरेज हो जाएंगे आप ... जिनको सिर्फ महसूस किया जा सकता है... जिनको व्यक्त करने के लिए शब्द ही नहीं बने.... अद्भुत अहसास
    एक कप चाय ...से लौट आती है जिन्दगी.... पुरानी यादें... बचपन की  अठखेलियाँ...  और नए पुराने दोस्त...वो प्यार भरी मीठी बातें.... वो शिकवे शिकायतें...
 
इस भगदौड़ भरी...जिन्दगी में... सुकून है चाय...सर दर्द हो या हो मन उदास...तन्हाई हो या हो  अकेलापन ... जीवन का खालीपन.. सब डूब जाते हैं ...चाय के उस  छोटे से प्याले में... पी कर तो देखिए .... कभी आँखे नम तो कभी मुस्कुरा जाती हैं आँखे... एक कप चाय से 

 सबसे बड़ी बात ...खाली बैठे हो ...तो एक कप चाय  से अच्छा कोई विकल्प ही नहीं है समय बिताने का....सर्द मौसम हो या तपती धूप या फिर रिमझिम बरसात ...चाय   का अलग ही आनन्द है.... बरसात हो और चाय संग पकौड़े... फिर तो बस परम् आनन्द....

 अब क्या ही कहूँ.... एक कप चाय ...वो भी दोस्तों संग अपनों संग...उदास जिन्दगी में रंग भर देती है... गोरी हो या काली चाय...  मीठी हो या फीकी ....सब के चेहरे गुलाब कर देती है... चाय...
तो चलिए ...हो जाये ....एक कप चाय ☺️

डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

शनिवार, 4 जून 2022

काँटे

छोटी थी ...तब सोचती थी कि गुलाब इतना प्यारा सा ....
इतनी भीनी खुशबू....हर रंग में मनमोहक... जरा सा प्यार से सहलाओ तो ....उसकी महक से सारा फिजा महक जाए ...पर फिर उसमें कांटे क्यों होते हैं....?? 
उलझी ही रहती ...
बालमन ऐसा ही होता है.... जो हर बात में सवाल..और वो भी अनगिनत.... कुछ तो बेसिरपैर के ....

लेकिन...
तब तो नहीं....
पर अब समझ आया कि...
हर सवाल का जबाब होता है.... सवाल कभी बेसिरपैर के नही होते ....कोई ना कोई  तथ्य होता ही है...हर सवाल जबाब का....
अब गुलाब को ही देखो ....अपनी भीनी महक से सबका दिल मोह लेते हैं...
चाहे सुंदरी के बालों में लगे या किसी को नेह वश दो या सुहाग सेज सजी हो ...
हर जगह अलग महत्व...पर साथ में काँटे ...??
काँटे वो भी फिजूल कहाँ होते हैं...
हर जगह एक संदेश तो देते हैं.... जहाँ गुलाब है वहाँ काँटो से सावधान रहो... ये काँटे ही ये सन्देश देते हैं... कि  जहाँ ख़ुशी है वहाँ जनझावत भी है...
एक बात और....
गुलाब में कांटे इसलिए  भी होते हैं... जिससे कोई उसे झटके से तोड़े तो ...लहूलुहान कर काँटे उसे जता दें कि गुलाब अकेला नहीं है... उसके भी पहरेदार हैं...
सच कहूँ तो...बिना काँटो का गुलाब अच्छा ही नहीं लगता....

गुलाब है जनाब आहिस्ता से सहेजिये...
 किताबों में रखे गुलाब जब भी मिलते हैं... हर बार ताजा ही होते हैं....

# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"