गुरुवार, 23 सितंबर 2021

निःशब्द

निःशब्द

जिन्दगी में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं ..यही है जिन्दगी ...परन्तु फिर भी कभी कभी जीवन में ऐसी घटनाएं
घटती हैं जिनके बारे में कह पाना आसान नहीं होता या यूँ कहिए तो हम पूरी तरह निःशब्द हो जाते हैं | हमारे पास कहने को बहुत कुछ होता है फिर भी दिल चुप हो जाना चाहता है...किंग्कर्तव्य विमूढ़ से हम स्वयं को अनिश्चय की स्तिथि में पाते हैं...||

कभी कभी  हमें प्रकृति भी दिखाती हैहमें ऐसे अद्भुत नजारे जिसमे हम स्तब्ध होकर खो जाते हैं हमारे पास कहने के कुछ बचता ही नहीं है.. हम अपलक निहारते हैं उस मंजर को …. उन अविस्मरणीय दृश्यों को देख  कल्पना मात्र से हमारा मन मयूर पुलकित हो झूमने लगता है...जैसे इंद्र धनुष के रंगों का मिलकर आसमान में बिखर अदभुत छटा बिखेरना...बिना  रुके काले बादलों का भागते जाना...पुरवाई पवन का लहराते पेड़ो से बातें करना,पहाड़ की अनंत ऊँचाइयों से झरनों का निरंतर बहते जाना,चहकते  हुए  पंछियों का आपस में बातें करना,नदियों का कल कल ध्वनि करते अविरल बहते जाना ....बारिश होते होते सुनहरी धूप का चमकना...और भी बहुत कुछ ....!!

इतना ही नहीं इसके अलावा भी बहुत से लम्हें ऐसे होते हैं जो हमें निःशब्द कर जाते हैं जैसे-किसी इंसान का सोच से परे काम कर जाना,हृदयस्पर्शी कविताओं का मूल भाव समझ जाना.... दरअसल निःशब्द होना भी सबकी प्रकृति नहीं होती,जो किसी के मर्म को समझ पाए सच्चे मायने में यही          निःशब्द होता है...|

 सच कहूँ तो....
जीवन मे वैसे तो प्रतिपल हमारे आसपास कुछ ना कुछ घटित होता ही रहता है परंतु हमारी सोच से परे आकस्मिक होने वाली सुखद और दुखद घटनाएं ..जब हम कहना तो बहुत कुछ चाहते हैं... पर कह नहीं पाते....तब ऐसा नहीं है कि हमारे पास शब्द नहीं होते ...परन्तु उन शब्दों को व्यक्त नहीं कर पाते ...अपने मनोभावों को शब्दों की माला कहूँ या फिर शब्दों का जामा नहीं पहना पाते ...यही है "निःशब्द


मंगलवार, 21 सितंबर 2021

व्यक्तित्व

आप अपने आप को एक व्यक्ति के रूप में कैसे वर्णित करते हैं?
 जीवन में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं? 

➡️स्वंय के व्यक्तित्व का अवलोकन करना वो भी स्वयं आसान नहीं होता ...क्योंकि हम कितने भी निष्पक्ष रहें फिर भी कहीं ना कहीं चूक हो ही जाती है |  फिर भी मैं यथासम्भव प्रयास करूँगा कि मैं स्वयं का निष्पक्ष अवलोकन करूँ |
सच कहूँ तो हमारी पहचान हमारे व्यक्तित्व से ही होती है  | और हमारा व्यक्तित्व हमारे मन में उठ रहे सकारात्मक और नकारात्मक विचारों द्वारा ही सँवरता और निखरता है |इन्ही सकारात्मक और नकारात्मक विचारों में तालमेल बैठता हुआ मैं स्वयं को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखता हूँ ..जो कि माँ के संरक्षण में रहते हुए... उनके द्वारा दिये हुए संस्कारों और उनकी आर्थिक स्थिति को देखकर एवं महसूस करके मैं उनके लिए मजबूत सम्बल के रूप में हमेशा ही उनके साथ खड़ा रहूँ |
इतना ही नही मुझे लगता है कि मैं परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित करने वाले  एवं अपने विचारों को सही दिशा देने वाले  युवा के रूप में निखर रहा हूँ |
कभी- कभी मैं सरल सहज और शान्त स्वभाव का होते हुए भी आक्रोशित हो जाता हूँ शायद यह मेरी युवावस्था के का प्रभाव है | परन्तु फिर भी मैं स्वयं को समय और परिस्थितियों से तालमेल बैठाने वाला और यथासम्भव दूसरों के  मनोभावों को समझ सम्मान करने वाले युवा के रूप में देखता हूँ |

2:-  अब मैं बात करता हूँ प्राथमिकता की..तो जहाँ तक प्राथमिकता का सवाल है जीवन में वैसे तो समय , परिस्थिति एवं उम्र के हिसाब से प्राथमिकतायें बदलती रहती हैं |
लेकिन जहाँ तक मेरी इस वक़्त की प्राथमिकता का सवाल है  तो मैं अपने लक्ष्य को पाने के लिए एकाग्रता पूर्वक प्रयत्नशील रहते हुए समय का सदुपयोग करूँ ...क्योंकि बीता हुआ समय वापस नहीं आता  | बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए भरसक प्रयत्न करूँ जिससे कि निकट भविष्य में मैं अपने परिवार एवं समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह ईमानदारी और कुशलता पूर्वक स्वयं के  संयत रखते हुए कर सकूँ | जिससे  कि भविष्य में मैं अपने देश और समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बन कर लोगों में एक उदाहरण के रूप में पेश कर सकूँ  |