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सोमवार, 25 मई 2020

किसी का दीप निष्ठुर हूँ-महादेवी वर्मा

सब आँखों के आँसू उजले -महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा
कविमहादेवी वर्मा
जन्म26 मार्च, 1907
जन्म स्थानफ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेश
मृत्यु22 सितम्बर, 1987
मृत्यु स्थानप्रयाग, उत्तर प्रदेश
मुख्य रचनाएँमेरा परिवार, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, शृंखला की कड़ियाँ, अतीत के चलचित्र, नीरजा, नीहार
शलभ मैं शापमय वर हूँ!
किसी का दीप निष्ठुर हूँ!

ताज है जलती शिखा;
चिनगारियाँ शृंगारमाला;
ज्वाल अक्षय कोष सी;
अंगार मेरी रंगशाला ;
नाश में जीवित किसी की साध सुन्दर हूँ!

नयन में रह किन्तु जलती
 पुतलियाँ अंगार होंगी;
प्राण में कैसे बसाऊँ
 कठिन अग्नि समाधि होगी;
फिर कहाँ पालूँ तुझे मैं मृत्यु-मन्दिर हूँ!

हो रहे झर कर दृगों से
 अग्नि-कण भी क्षार शीतल;
पिघलते उर से निकल
 नि:श्वास बनते धूम श्यामल;
एक ज्वाला के बिना मैं राख का घर हूँ!

कौन आया था न जाने
 स्वप्न में मुझको जगाने;
याद में उन अँगुलियों के
 है मुझे पर युग बिताने;
रात के उर में दिवस की चाह का शर हूँ!

शून्य मेरा जन्म था,
अवसान है मुझको सबेरा;
प्राण आकुल से लिए,
संगी मिला केवल अँधेरा;
मिलन का मत नाम ले मैं विरह में चिर हूँ!

                     महादेवी वर्मा