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बुधवार, 29 अप्रैल 2020

राही चल अकेला-प्रदीप

चल अकेला चल अकेला चल अकेला 
 तेरा मेल पीछे छूटा राही चल अकेला 
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 हजारों मील लम्बे रस्ते तुझको बुलाते 
 यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते 
 है कौन सा वो इन्सान यहाँ पे
 जिसने दुःख ना झेला 
 चल अकेला चल अकेला चल अकेला...

तेरा कोई साथ न दे तो Image result for kavi pradeep
 तू खुद से प्रीत जोड़ ले 
 बिचौना धरती को करके 
 अरे आकाश ओढ़ ले 
 पूरा खेल अभी जीवन का
 तूने कहाँ है खेला 
 चल अकेला चल अकेला चल अकेला
 तेरा मेल पीछे छूटा राही चल अकेला
      Image result for kavi pradeepकविवर प्रदीप

ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप

ऐ मेरे वतन के लोगों
 तुम खूब लगा लो नारा
 ये शुभ दिन है हम सब का
 लहरा लो तिरंगा प्यारा
 पर मत भूलो सीमा पर
 वीरों ने हैं प्राण गँवाए
 कुछ याद उन्हें भी कर लो -२
 जो लौट के घर न आये -२

 ऐ मेरे वतन के लोगों
 ज़रा आँख में भर लो पानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 जब घायल हुआ हिमालय
 खतरे में पड़ी आज़ादी
 जब तक थी साँस लड़े वो
 फिर अपनी लाश बिछा दी
 संगीन पे धर कर माथा
 सो गये अमर बलिदानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 जब देश में थी दीवाली
 वो खेल रहे थे होली
 जब हम बैठे थे घरों में
 वो झेल रहे थे गोली
 थे धन्य जवान वो अपने 
 थी धन्य वो उनकी जवानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 कोई सिख कोई जाट मराठा
 कोई गुरखा कोई मदरासी
 सरहद पर मरनेवाला
 हर वीर था भारतवासी
 जो खून गिरा पर्वत पर
 वो खून था हिंदुस्तानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 थी खून से लथ-पथ काया
 फिर भी बन्दूक उठाके
 दस-दस को एक ने मारा
 फिर गिर गये होश गँवा के
 जब अन्त-समय आया तो
 कह गये के अब मरते हैं
 खुश रहना देश के प्यारों
 अब हम तो सफ़र करते हैं
 क्या लोग थे वो दीवाने
 क्या लोग थे वो अभिमानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 तुम भूल न जाओ उनको
 इसलिये कही ये कहानी
 जो शहीद हुए हैं उनकी
 ज़रा याद करो क़ुरबानी

 जय हिन्द...
जय हिन्द की सेना -२
 जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द-----------Image result for kavi pradeep
                             प्रदीप