जिन्दगी में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं ..यही है जिन्दगी ...परन्तु फिर भी कभी कभी जीवन में ऐसी घटनाएं
घटती हैं जिनके बारे में कह पाना आसान नहीं होता या यूँ कहिए तो हम पूरी तरह निःशब्द हो जाते हैं | हमारे पास कहने को बहुत कुछ होता है फिर भी दिल चुप हो जाना चाहता है...किंग्कर्तव्य विमूढ़ से हम स्वयं को अनिश्चय की स्तिथि में पाते हैं...||
कभी कभी हमें प्रकृति भी दिखाती हैहमें ऐसे अद्भुत नजारे जिसमे हम स्तब्ध होकर खो जाते हैं हमारे पास कहने के कुछ बचता ही नहीं है.. हम अपलक निहारते हैं उस मंजर को …. उन अविस्मरणीय दृश्यों को देख कल्पना मात्र से हमारा मन मयूर पुलकित हो झूमने लगता है...जैसे इंद्र धनुष के रंगों का मिलकर आसमान में बिखर अदभुत छटा बिखेरना...बिना रुके काले बादलों का भागते जाना...पुरवाई पवन का लहराते पेड़ो से बातें करना,पहाड़ की अनंत ऊँचाइयों से झरनों का निरंतर बहते जाना,चहकते हुए पंछियों का आपस में बातें करना,नदियों का कल कल ध्वनि करते अविरल बहते जाना ....बारिश होते होते सुनहरी धूप का चमकना...और भी बहुत कुछ ....!!
इतना ही नहीं इसके अलावा भी बहुत से लम्हें ऐसे होते हैं जो हमें निःशब्द कर जाते हैं जैसे-किसी इंसान का सोच से परे काम कर जाना,हृदयस्पर्शी कविताओं का मूल भाव समझ जाना.... दरअसल निःशब्द होना भी सबकी प्रकृति नहीं होती,जो किसी के मर्म को समझ पाए सच्चे मायने में यही निःशब्द होता है...|
सच कहूँ तो....
जीवन मे वैसे तो प्रतिपल हमारे आसपास कुछ ना कुछ घटित होता ही रहता है परंतु हमारी सोच से परे आकस्मिक होने वाली सुखद और दुखद घटनाएं ..जब हम कहना तो बहुत कुछ चाहते हैं... पर कह नहीं पाते....तब ऐसा नहीं है कि हमारे पास शब्द नहीं होते ...परन्तु उन शब्दों को व्यक्त नहीं कर पाते ...अपने मनोभावों को शब्दों की माला कहूँ या फिर शब्दों का जामा नहीं पहना पाते ...यही है "निःशब्द

