1..लोग खुदको खुदा समझते हैं
तो सजदे पे जाते क्यों हैं?
गम आगर है इस कदर जिन्दगी में
तो लोग मुसकुराते क्यों हैं?
खुशियां आनी हैं हर किसी के दामन में
तो लोग आंसू बहाते क्यों हैं ?
2.कई- कई चेहरे हैं हर शक्सियत के
एक के सिवा बाकीको लोग छुपाते क्यों हैं?
लोग कहते हैं धोखा उनकी फितरत नहीं
फिर सतरंज की गोटियां बिछाते क्यों हैं ?
सफेद के साथ ईक काला चेहरा भी है
हम सब उस काले चेहरे को छुपाते क्यों?
तो सजदे पे जाते क्यों हैं?
गम आगर है इस कदर जिन्दगी में
तो लोग मुसकुराते क्यों हैं?
खुशियां आनी हैं हर किसी के दामन में
तो लोग आंसू बहाते क्यों हैं ?
2.कई- कई चेहरे हैं हर शक्सियत के
एक के सिवा बाकीको लोग छुपाते क्यों हैं?
लोग कहते हैं धोखा उनकी फितरत नहीं
फिर सतरंज की गोटियां बिछाते क्यों हैं ?
सफेद के साथ ईक काला चेहरा भी है
हम सब उस काले चेहरे को छुपाते क्यों?
3.यदि पीठ मे खंजर ही घोपना है
तो लोग सीने से लगाते क्यों हैं?
मजहब नही होता है आतंकवाद कोई,
तो लोग धर्म के नाम पर लाशे बिछाते क्यों हैं?
तो लोग सीने से लगाते क्यों हैं?
मजहब नही होता है आतंकवाद कोई,
तो लोग धर्म के नाम पर लाशे बिछाते क्यों हैं?
4. हम जमीं से आसमां तक,चांद से मंगल यान तक पहुंचे
तो कुपोषित कदम जवानी के डगमगाते क्यों हैं?
दुनिया विकास के शिखर पर है
तो बच्चे भूंख से बिलबिलाते क्यों हैं?
तो बच्चे भूख से बिलबिलाते क्यों है़?
सच के लिए ही परेसान है दुनिया
तो सच सुनकर लोग तिलमिलात क्यों हैं////
मासूम कवी
राजन विघीर्थी
17/09/17
तो कुपोषित कदम जवानी के डगमगाते क्यों हैं?
दुनिया विकास के शिखर पर है
तो बच्चे भूंख से बिलबिलाते क्यों हैं?
तो बच्चे भूख से बिलबिलाते क्यों है़?
सच के लिए ही परेसान है दुनिया
तो सच सुनकर लोग तिलमिलात क्यों हैं////
मासूम कवी
राजन विघीर्थी
17/09/17
1 टिप्पणी:
गजब
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