सोमवार, 29 अप्रैल 2024

सोच रही हूँ....
क्या हूँ " मैं "...
" मैं "
शायद एक अनगढ़ सा  पत्थर हूँ
शान्त और सपाट..निर्विकार सा....

दोस्तों अब ...
मैं ये तुम पर छोड़ती हूँ कि...
कि तुम किस स्वरूप में
मुझे ढालोगे....
तुम चाहो तो मुझे उछालो..
और फेंक दो दूसरे के शीशे के
घरों को तोड़ने के लिए...

या फिर....
मुझे तराश कर...
आकार दे..सुसज्जित कर..
देवता बना पूज लो...

ये सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी मर्जी है...
कि तुम्हारे लिए मैं क्या हूँ....
एक व्यर्थ का पत्थर या देवता..
सब तुम पर छोड़ती हूँ....

और हाँ दोस्तों .....
यदि तुम सोचते हो कि....
मैं तुम्हारे रास्ते की वाधा हूँ...
तो तुम मुझे ठोकर मार कर....
अपने रास्ते से हटा देना...
मुझ से बच कर किनारा कर लेना...
एक पल के लिए भी तुम....
विचलित मत होना...

दोस्तों ...
सब कुछ तुम पर छोड़ती हूँ....
अब देखना है....
मेरी नियति क्या है ....??

#  नीलम. " नीरा "

गुरुवार, 28 सितंबर 2023

#रात्री विश्राम #

#रात्री विश्राम  #

कभी ख़यालों में
कभी सवालों में
रख लेता हूँ मैं तुम्हें जैसे
बातों में क्या 
अब भी मुझे तुम 
रख पाती हो 

इश्क़ की स्याह में
रंगा मन मेरा
इन्हीं रंगों में 
तुम भी बोलो 
खयाल अपना क्या
रंग पाती हो

लिखता हूँ अक्सर
तुम्हें प्रेम में
प्रेम में मुझे तुम
क्या पढ़ पाती हो
कहो मुझे क्या
तुम पढ़ पाती हो?

बुधवार, 20 सितंबर 2023

प्रेम......प्रेम क्या है....??ये एक ऐसा अनसुलझा सरल सहज सा सुलझा सा सवाल है....जिसके ज़बाब तो बहुतेरे हैं... पर फिर भी सवाल ही है... व्यक्त और अव्यक्त के बीच हिंडोले लेता मासूम सा प्रेम ... सच बात तो ये है...बिना आकार प्रकार का प्रेम साकार सा महसूस होता है , कोई रूप रंग नहीं फिर भी रंगीन सा लगता है , कोई खुशबू नही फिर भी अपनी महक से मदहोश करता है... प्रेम के आँखें नहीं, फिर भी देखता है , हाथ नहीं फिर भी आँखे खुद ही पोंछता है , पैर नहीं फिर भी प्रेम दो इंसानों के साथ साथ जीवन भर चलता है....प्रेम की कोई गति सीमा नहीं फिर भी निर्बाध चलता है.... प्रेम को समझ जाए उससे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं... प्रेम को मीरा ने जाना , प्रेम को राधा ने जाना , प्रेम को लैला ने जाना, सोनी ने जाना, शीरी ने जाना ,और जिनका आज भी दीवाना है जमाना पर आज भी इस दुनिया ने प्रेम को सही ढंग से नही जाना एक भूल भुलैया बना दिया .... देखा जाय तो प्रेम एक ऐसा भाव है जो जीवन का खुशियों से अभिनंदन करता है , और हमने प्रेम को शादी के द्वारा गठबंधन बना दिया, पर क्या सोचा है कि क्या प्रेम को कभी बंधा जा सका है...उन्मुक्त प्रेम तो स्वछंद है .... सच कहें तो दरअसल जाना ही नहीं जा सकता – प्रेम क्या होता है.....? क्योंकि प्रेम में सिर्फ डूबा जा सकता है और इसमें डूबने बाला ही जान सकता है की प्रेम कितना गहरा है.....चाहे फिर वह ईश्वर से हो या इंसान से,या फिर किसी जानवर से पक्षी से कोई फर्क नहीं पड़ता ,प्रेम की कोई सीमा नहीं असीमित प्रेम किसी से भी हो क्या फर्क पड़ता है....प्रेम स्वयं में ईश्वर या यूँ कहें प्रेम ही ईश्वर है.... सच कहें तो प्रेम खुदा है , ज्यादा होने पर प्रेम बिना बंधन के बंधा है , एक डोर में गुंथा है.....कम हो तो दुआ है , और कमोबेश हो तो जिंदगी को समझने की दवा है , सच कहे तो प्रेम एक ऐसी हवा है , जिसकी जद में सारा आलम है , प्रेम ऐसा सागर है जिसमें हर कोई डूबना चाहता है.... प्रेम कोई भाव नहीं, ना कोई राग है, प्रेम कोई इच्छा नहीं, ना ही कोई तृष्णा है , प्रेम कोई रूप नहीं, ना ही कोई पहचान है , क्योंकि प्रेम सब कुछ है , और कहें तो प्रेम कुछ नहीं , प्रेम निराकार होता हुआ भी साकार है द्वैत होते हुए भी अद्वैत है.... प्रेम एहसासों की भावनाओं गुंथी ही माला है जिसको समर्पण के धागे में पिरोया है...प्रेम दो शरीरों का नहीं रूह का मिलन है प्रेम वो तप है जो इसमें जितना तपता है उतना ही पार जाता है....मूक प्रेम बहुत वाचाल है....सच प्रेम तो प्रेम है अखण्ड अलौकिक अद्भुत अन्नत 💕

शनिवार, 17 जून 2023

संवाद

सुनो.....
तुम हमेशा कहते हो कि
मै अक्सर चुप ही रहती हूं...
पर ऐसा नहीं है....

मै....
बोलती तो सबसे हूँ
पर तुमसे नही बोलती 

क्योंकि तुम पढ़ लेते हो
मेरी कही अनकही बातें 

और 
मुझे
मेरी आंखों को
मेरे मौन को...
तुम...समझ जाते हो 
उस खामोशी को..
जिन्हें मैं..
नहीं बांध सकती शब्दों में...

यही तो वो बात है
जो लाती है
मुझे
तुम्हारे और करीब
और पाना चाहती हूं
सनिंध्य तुम्हरा ....

मेरी चुप्पी को तुम पिरो देते हो
अपने शब्दों की माला में 
कर देते हो साकार मेरे
हर अनकहे भावों को

और आनंदित हो उठती हूँ मै
ये सोचकर
कि
तुम अकेले ऐसे हो मेरी दुनिया मे
जो जानते हो
मेरी अनकही भी....

शुक्रवार, 12 मई 2023

जीवन मंत्र by ankur

जीवन में कुछ रोड़े है
बहुत नहीं बस थोड़े है
तुमको आगे बढ़ते जाना है
इनको खुद ही हट जाना है
इनसे यदि तुम घबराओगे
तो मिट्टी में मिल जाओगे।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
       अंकुर गुप्ता

गुरुवार, 2 मार्च 2023

सफर

सुना था ....
 "सफर"  हमेशा सुहाना होता है...
पर वो...

 कैसा "सफर" था  जो....
 मैं आज तक "सफर" कर रही हूँ
एक "सफर" से दूसरे "सफर" का  "सफर"  
ऐसा "सफर" होता है जो मैं ही नहीं 
वल्कि
स्वंय "सफर" को भी "सफर" तय करना पड़ता है....

रविवार, 19 फ़रवरी 2023

मैं तन्हा हूं

( मेरे परम् मित्रों... ये केवल एक पोस्ट है...
मैं  शब्द का संबोधन किसी व्यक्ति विशेष या मेरे अपने लिए नहीं है..... धन्यवाद )

 मैं...टूट रही हूँ.. बिखर रही हूँ.. 
आहिस्ता आहिस्ता 
डूब रही हूँ.. और..धीरे धीरे 
खुद ही खुद में विलीन हो रही हूँ..
पर...कहाँ.. और ..क्यों...??
शायद  मुझको भी पता नहीं..
असमंजस में हूं.....
ये ऊँचे ऊँचे मकान..जहाँ चार दीवारी और छत तो है..
पर...घर नहीं
लोग की भीड़ तो बहुत है...
पर....इंसान नहीं
रिश्ते और उनके नाम बहुत हैं...
पर...अपना कोई नहीं
औरत भी है आदमी भी हैं..
पर...माँ-पिता  नहीं 
खाना पानी..सब कुछ तो है..
पर...भोजन का स्वाद नहीं
सब कुछ तो है... ऐसो आराम का सामान..
हर चीज मुहैया है..
पर..फिर भी 
मैं...टूट रही हूँ... बिखर रही हूँ..
समेट नहीं पा रही खुद को..
पर क्यों...
शायद कोई बजह ...
वजह कोई नहीं .....
पर कोई तो वजह होगी...
मुझे भी पता नहीं..

#  नीलम " नीरा "