#रात्री विश्राम #
कभी ख़यालों में
कभी सवालों में
रख लेता हूँ मैं तुम्हें जैसे
बातों में क्या
अब भी मुझे तुम
रख पाती हो
इश्क़ की स्याह में
रंगा मन मेरा
इन्हीं रंगों में
तुम भी बोलो
खयाल अपना क्या
रंग पाती हो
लिखता हूँ अक्सर
तुम्हें प्रेम में
प्रेम में मुझे तुम
क्या पढ़ पाती हो
कहो मुझे क्या
तुम पढ़ पाती हो?
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