बुधवार, 20 सितंबर 2023

प्रेम......प्रेम क्या है....??ये एक ऐसा अनसुलझा सरल सहज सा सुलझा सा सवाल है....जिसके ज़बाब तो बहुतेरे हैं... पर फिर भी सवाल ही है... व्यक्त और अव्यक्त के बीच हिंडोले लेता मासूम सा प्रेम ... सच बात तो ये है...बिना आकार प्रकार का प्रेम साकार सा महसूस होता है , कोई रूप रंग नहीं फिर भी रंगीन सा लगता है , कोई खुशबू नही फिर भी अपनी महक से मदहोश करता है... प्रेम के आँखें नहीं, फिर भी देखता है , हाथ नहीं फिर भी आँखे खुद ही पोंछता है , पैर नहीं फिर भी प्रेम दो इंसानों के साथ साथ जीवन भर चलता है....प्रेम की कोई गति सीमा नहीं फिर भी निर्बाध चलता है.... प्रेम को समझ जाए उससे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं... प्रेम को मीरा ने जाना , प्रेम को राधा ने जाना , प्रेम को लैला ने जाना, सोनी ने जाना, शीरी ने जाना ,और जिनका आज भी दीवाना है जमाना पर आज भी इस दुनिया ने प्रेम को सही ढंग से नही जाना एक भूल भुलैया बना दिया .... देखा जाय तो प्रेम एक ऐसा भाव है जो जीवन का खुशियों से अभिनंदन करता है , और हमने प्रेम को शादी के द्वारा गठबंधन बना दिया, पर क्या सोचा है कि क्या प्रेम को कभी बंधा जा सका है...उन्मुक्त प्रेम तो स्वछंद है .... सच कहें तो दरअसल जाना ही नहीं जा सकता – प्रेम क्या होता है.....? क्योंकि प्रेम में सिर्फ डूबा जा सकता है और इसमें डूबने बाला ही जान सकता है की प्रेम कितना गहरा है.....चाहे फिर वह ईश्वर से हो या इंसान से,या फिर किसी जानवर से पक्षी से कोई फर्क नहीं पड़ता ,प्रेम की कोई सीमा नहीं असीमित प्रेम किसी से भी हो क्या फर्क पड़ता है....प्रेम स्वयं में ईश्वर या यूँ कहें प्रेम ही ईश्वर है.... सच कहें तो प्रेम खुदा है , ज्यादा होने पर प्रेम बिना बंधन के बंधा है , एक डोर में गुंथा है.....कम हो तो दुआ है , और कमोबेश हो तो जिंदगी को समझने की दवा है , सच कहे तो प्रेम एक ऐसी हवा है , जिसकी जद में सारा आलम है , प्रेम ऐसा सागर है जिसमें हर कोई डूबना चाहता है.... प्रेम कोई भाव नहीं, ना कोई राग है, प्रेम कोई इच्छा नहीं, ना ही कोई तृष्णा है , प्रेम कोई रूप नहीं, ना ही कोई पहचान है , क्योंकि प्रेम सब कुछ है , और कहें तो प्रेम कुछ नहीं , प्रेम निराकार होता हुआ भी साकार है द्वैत होते हुए भी अद्वैत है.... प्रेम एहसासों की भावनाओं गुंथी ही माला है जिसको समर्पण के धागे में पिरोया है...प्रेम दो शरीरों का नहीं रूह का मिलन है प्रेम वो तप है जो इसमें जितना तपता है उतना ही पार जाता है....मूक प्रेम बहुत वाचाल है....सच प्रेम तो प्रेम है अखण्ड अलौकिक अद्भुत अन्नत 💕

कोई टिप्पणी नहीं: