सुनो....
खोजती सी इन आँखो में ..…
ख्याब कुछ पुराने हैं...
पर.... ख्याल
आज भी तुम्हारे नए हैं..
वो सुबह की पहली किरन सा तुम्हारा चेहरा...
वो सर्द दोपहरी धूप सा कुनकुना अहसास तुम्हारा..
वो ढलती शाम सा तुम्हारा नजरें झुका कर मध्यम से चले जाना...
वो चाँदनी रात सा तुम्हारा जुल्फों को झटक कर हौले से मुस्कुराना....
है कहाँ पुराना वो तुम्हारा ख्याल ....
वो तो आज भी नया सा है....
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें