ए सुनो....
बस एक बार मिल लो ...
बहुत कुछ उलझा है तुम संग...
वही उलझन सुलझा लें..
बहुत सी खट्टी मीठी यादें...
बहुत सी अच्छी बुरी बातें...
बहुत से मान मनुहार के पल...
वो तुम्हारा आँखों से बोलना...
वो तुम्हारे मेरी हर बात को हल्के से उछलना...
वो तुम्हारा लटों को अपने हाथ से पीछे करना...
वो पीछे से आकर आँखें बन्द करना...
वो अभी मन भरा नहीं कहकर रोकना...
जाते जाते मुड़कर तुम्हारा देखना...
और
वो आखिरी बार तुम्हारा बिना मुड़े चले जाना ...
बहुत सी बातें हैं... तुम आओ तो तुम
बस एक बार तुमसे उलझना है
उलझ कर तुमझे बहुत कुछ सुलझाना है....
समझ रहे हो ...ना तुम
सब कुछ सुलझाने के लिए...
जरूरी है तुमसे उलझना...
# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"
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