गुरुवार, 24 जून 2021

जिन्दगी और लम्हे

जिन्दगी
जिन्दगी के उन लम्हों को कैद करना चाहती हूँ....जो हंसाते है और कभी कभी रुलाते हैं... सच कहूँ तो लम्हे तो लम्हे हैं  जब भी याद आते हैं एक जिंदगी दे  जीते हैं एक उम्मीद एक ताजगी ...  वक्त गुजरता है पर वक्त के साथ हर लम्हा खुशगवार सा लगने लगता है... 
कभी सोचा है उन लम्हों के बारे में...जो कभी आँखों के कोर नम कर गए....और अपनी याद छोड़ गए... घटा सी घिर आयी ...उन लम्हों को भी कैद करना चाहती हूँ... अपने आगोश में भरना चाहती हूँ...
आप भी सोच रहे होंगे ...कितनी बेबकूफी भरी बात कर रही हूँ... कौन याद करता है ऐसे लम्हों को ...जो हमारी जिंदगी के कुछ पल या कहूँ वक्त ही खराब कर गए....
पर आप थोड़ा नजरिया बदल कर सोचिए... अगर आपकी जिंदगी में वो लम्हे या पल या वक्त नहीं आता तो आप अपने इरादे कैसे मजबूत करते ....कैसे जान पाते कि जिन्दगी चल रही है  .सच कहूँ तो उतार चढ़ाव ना हों तो जिन्दगी क्या है... अब सूरज को ही देखो ना हर रोज  अंधेरे का सामना करता है फिर उग जाता है नई ऊर्जा के साथ...
और हाँ एक बात और... आज जब आप बीते हुये उदासी भरे लम्हों को याद करते हो तो एक मुस्कान तो चेहरे पर आ ही जाती है...और दे जाता है वो गमगीन लम्हा भी एक सीख... मिल जाता है एक काश का साथ और आगे बढ़ने की ऊर्जा ... तो बस जिंदगी तो जिंदगी है चलती ही रहेगी...इन प्यारे से लम्हों के साथ...फिर मिलूँगी..

डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

कोई टिप्पणी नहीं: