सच कहूँ तो कहानियों का संसार देख मैं स्वंय उलझ जाता हूँ... मुझे लगता है कि मै स्वंय एक कहानी हो गया हूँ .सच ही तो है... मैं भी एक कहानी जैसा ही हूँ... और मुझे जुड़ी है छोटी छोटी हजारों कहानियाँ... शायद तभी मैं कहानी लिखता हूँ....
कहानियाँ कुछ अच्छी और कुछ बुरी.. कुछ डरावनी तो कुछ ऐसी कि लगता है कहानी सच ही है...पर एक बात तो है इन कहानियों का संसार कितना भी बड़ा हो पर सब में इतना जुड़ाव होता है कि हर कहानी अपने अंदर एक सीख ,एक उद्देश्य लिए रखती है.... हर कहानी का एक बजूद होता है...
बस तभी तो जुड़ाव है मेरा कहानियों से...और जब भी थोड़ा वक्त मिलता है.... मैं लिखने बैठ जाता हूँ ...कहानी.खो जाता हूँ एक नयी कहानियों की दुनिया में....
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