बुधवार, 7 जुलाई 2021

जिन्दा सवाल

जी हाँ जिन्दा सवाल 
आप भी सोच रहे होंगे...ये भी क्या सवाल तो सवाल है इसमें जिन्दा वाली क्या बात है... बिलकुल सही... 
हमारी जिन्दगी दिन प्रतिदिन अनेकों सवाल का सामना करती है अगर मैं ये कहूँ सुबह से लेकर शाम तक ना जाने कितने ही सवालों से रूबरू होते हैं...सवाल ही हैं जो हमें बहुत कुछ सिखाते हैं... जूझना.. उलझना और फिर सुलझना...
इसके साथ ही सवाल ही हैं जो हमारे साथ जुड़े रहते हैं... यहाँ तक तो बात साधरण सी है ये तो रोजमर्रा की अगर कहूँ छोटी सी बात है तो ...चलेगा  एक बात और सवाल है तो उसका जबाब भी होता है... हाँ हर सवाल का जबाब होता है...यहाँ तक की हर सवाल अपने साथ जबाब लेकर ही पैदा होता है....
तो चलिए आगे बढ़ते हैं.... कि ये जिन्दा सवाल कहाँ से आया....बताती हूँ... सवालों से जूझते हैं उभरते हैं... और बढ़ जाते हैं आगे....पर कभी कभी कोई ऐसा सवाल ...जिसका प्रतिउत्तर तो हम जानते हैं और देना भी चाहते हैं... पर हम दे नहीं पाते ..जिसके लिए हम लड़ते हैं ...किसी और से नहीं बल्कि  स्वंय से....और  वो सवाल हमारे जेहन में इतनी अंदर तक पैठ कर जाता है कि ....हम बार बार ना जूझते हैं उस सवाल से.... हर बार वो सवाल कौंधता है हमारे दिलोदिमाग में.... मथ देता है वो हमें...
पर हमारी कहीं ना कहीं कोई विवशता रहती है... जब हम सुलझ कर भी उलझ जाते हैं... और वो जिंदा से सवाल हमें अंदर तलक कुरेदता रहता है... एक टीस सी उभरता है... हर पल जब भी हमारा ध्यान जाता है... बस यही है उलझा सा सुलझा पर स्वंय में ही फंसा हुआ वो सवाल...जो जिंदा है...जो कुलबुलाता रहता है हमारे अंदर...
अच्छा एक बार विचार करिये...
डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

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