दास्ताँ -ए- जिन्दगी
Happy taddy Day
Dear Friends....चलिए जमाने के साथ कदमताल मिलाकर अंग्रेजियत के साथ आगे बढ़ते हुए मनाते हैं टेडी डे....
पर एक बात बताऊँ ...
कितने भी महंगे टेडी ले लो पर जो आनन्द खुशी माँ के हाथ की बनी कपड़े की गुड़िया में मिलती थी वो कहीं नही मिलती ....
याद है ना वो सूट के बचे कपड़े की गुड़िया
काले बटन से आँखे, लाल धागे से होठ, और स्वेटर के बचे ऊन से उसके बाल....और उसकी लम्बी सी चोटी...
सच कहूँ तो बहुत याद आती है वो गुड़िया
छुट्टी बाले दिन ...
हम बच्चों की टोली में बंट जाना
और गुड़िया गुड्डे का व्याह रचाना
कुछ मांग कर और कुछ अपने हिस्से से छिपा कर
बिस्कुट और नमकीन की दावत करना ....
पता नहीं कितने ही किस्से...
सच कहती हूं.....
देख कर गुड़िया को आज भी खो जाती हूँ बचपन में
ये आज के टेडी रंग बिरंगे नरम से बहुत सुन्दर हैं ....
मन को लुभाते भी बहुत हैं ....
पर...
माँ के हाथ की नये पुराने कपड़ों से बनी ....
ऊन के लम्बे बालों वाली ...
बड़ी बड़ी कजरारी आँखों वाली ....
वो गुड़िया ....
आज के मंहगे टेडी पर रौब जमाती है....
टिकता नहीं टेडी उस भोली भाली मासूम सी दिलकश " गुड़िया " के आगे....
# डॉ नीलम गुप्ता " नीरा "