मंगलवार, 20 सितंबर 2022

ललना

एक नारी, स्त्री, ललना.... ना जाने कितने ही नामों से जाने जानी वाली एक औरत का जब नाम आता है ...... तब एक खाका उभर कर सामने आता है.... दुबली पतली मांग को चटख सिन्दूर से सजाए , माथे पर लाल बिंदी लगाए , होठों पर मधुर मुस्कान लिए , कजरारी आंखों वाली  , कानों को बालियों से सजाए ,  बालों को करीने से बांधे  और एक लापरवाह सी लट गालों को चूमती , गले में  मंगल सूत्र डाल कर इतराती .... ... ओर.....पैरो पर पायल - बिछुए  और महावर से स्वयं को  संवारती ...  करीने से बंधी साड़ी में खुद को समेटे हुए.... यही तो है वो   
 स्त्री.... 
               यही स्त्री जो सबकी आकर्षण का केंद्र है.... रूक जाती हैं  चलते चलते निगाहें उसके  उभारों पर... यही नहीं निगाह रखी जाती है उसके एक एक पल पर.... उसका उठना बैठना सभी तो दायरे तय कर दिए जाते हैं....जैसे कोई ठेकेदार हो उसका...
      पर क्या सोचा है कभी... उसमें भी जान है एक दिल है जो धड़कता है...कुछ भावनाएं हैं, अहसास है ,उसका भी वजूद है....  शायद नहीं ना...अगर सोचा होता तो वो यूं मजबूर ना होती निगाहें झुका कर चलने को....
      सच तो ये है ...कोई ये भी नहीं सोचता कि ये वही नारी है..... जो ना जाने अपने अंदर कितनी वेदना , दर्द और मान - अपमान , तिरस्कार का अथाह समुंदर समेटे हुए है अपने अंदर.... कितनी की अपनी इच्छाओं का गला घोटाती है ....परिवार की इच्छाओं को पूरा करने के लिए.... हर रोज सौ दफा मरती है...एक परिवार को बचाने के लिए... हजार बार वो चुप होती है दूसरों को बोलने का मौका देने के लिए ... कभी स्वयं चुप होती है तो ....कभी जबरन चुप कराई जाती है...वो चीत्कार नहीं करती बस पी लेती है विष का घूंट मीरा की तरह.... वो  सींचती है रिश्तों को अपने आंख के पानी से... तभी तो वो बनती है त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति....
            ये स्त्री ही है..... जहां जाती है वहां महका देती है घर आंगन .... ईट मिट्टी गारे जैसी  बेजान चीजों में जान डाल देती है..... ईट मिट्टी गारे से बने मकान को अपने शुभ कदम रखते ही घर और अपनी तपस्या से घर को मन्दिर बना देती है .... जिसके चहकने से  किलकारी गूंजती हैं घर में....
      सच में स्त्री तुम इस धरा का मान हो 💕

# नीलम "नीरा"


सोमवार, 29 अगस्त 2022

पत्नी



    हमने बहुत बार देखा है और सुना भी है कि ....पत्नी ऐसी होती है या फिर बीबी वैसी होती हैं....इतना ही नहीं सारे जोक्स  में से जहां तक मैं समझती हूं 90 % जोक्स बीबियों पर होते हैं.... और मजेदार बात ये है कि ये बीबियाँ इन जोक्स पर स्वयं भी हंसती है...
         सच बात तो ये है कि ये बीबियाँ बड़ी ही निराली और अनोखी होती हैं.... मेरी ये बात शायद आपको कुछ अटपटी लगे.... पर इतना कहूंगी कि कभी पत्नियों पर गौर करिए...  आपने शायद कभी नोटिस किया हो जब आप ऑफिस के लिए जाते समय  बीबी को टिफिन बनाने में देर हो जाने पर..... गुस्से में बिना टिफिन के चले जाते हैं .....तो वह पूरा दिन बीवी का खराब हो जाता है वह आपके बिना दिन भर खाना नहीं  खाती .... लेकिन दिन के पूरे काम यथावत करती ही रहती है....
      इतना ही नहीं जब कभी आप रात  में नाराज होकर बिना खाना खाए सो जाते हैं तो बीवी आपको मान मनुहार करके मना ही लेती है और भूखे पेट सोने नहीं देती जबकि वह खुद बिना खाए सो जाती है....

इसके अतिरिक्त.एक किस्सा मै आपको बताती हूं....

       एक बार किसी पति पत्नि का छोटी सी बात को लेकर झगड़ा हो गया .... गर्मियों की रात थी दोनों गुस्से में अपनी अपनी जगह सो गए .....करीब आधी रात को पति को प्यास लगी वह उठा और पास ही में रखी मेज पर वाटर कूलर से खुद उठकर पानी पिया ........पानी पीकर जैसे ही वह बिस्तर पर जाने के लिए मुड़ा उसने देखा पास ही बिस्तर पर लेटी बीवी उसे गुस्से से देख रही थी और बोली आपने पानी खुद क्यों किया पति भी गुस्से में था अकड़ कर बोला हाथ-पांव सलामत है खुद भी सकता हूं तुम्हारा मोहताज नहीं हूं.....
      पत्नी गुस्से से उठ कर बैठ गई और जोर से बोली एक बात गौर से सुन लो लड़ाई अपनी जगह है लेकिन मैं अपना हक और अपनी खुशी किसी को जीने नहीं दूंगी और ना ही किसी का अधिकार होने दूंगी....
        पति हक्का-बक्का उसे देखता रहा फिर पत्नी बोली आपको पता है..... पानी देते हुए या आपका काम करते हुए मुझे कितनी खुशी होती है भले ही हमारी लड़ाई हो या फिर आपस में बातचीत बंद हो....
                यह मैं आपको बता देती हूं कि आप ना तो पानी खुद पिएंगे और ना ही खाना खुद लेकर खाएंगे बीवी की आंखें इतना कहते हुए नम और सुर्ख थी....
        पति ने स्नेह से उसे देखते हुए गले से लगा लिया और झगड़े को वहीं पर विराम दिया 💕
                       ........................

          समय के साथ वक्त आगे बढ़ता गया .....कुछ सालों बाद या एक अंतराल बाद जब एक रात को पति पानी पीने के लिए उठा तो..... उसने दीवार पर लगी अपनी पत्नी की खूबसूरत तस्वीर को देखा उसकी आंखों से पानी की अविरल धारा बहने लगी उसने  हाथों से भरे मन से उस तस्वीर को सहलाया.....
                 तब उसे अपनी पत्नी की वह बात याद आई जब वह कहती थी... चाहे लड़ाई हो या झगड़ा हो या फिर बातचीत बंद हो .....लेकिन मोहब्बत तो मोहब्बत होती है मोहब्बत कभी मरती नहीं 
       सच में पत्नियां होती ही ऐसी अलबेली है एक पहेली की तरह वह अपने अधिकारों का भरपूर सम्मान करके बड़े ही जतन से सहेज कर उन पर अपना पूरा हक जमा कर रखती हैं.... ❤️

Dr नीलम गुप्ता "नीरा"


रविवार, 28 अगस्त 2022

पुरुष



ईश्वर की अद्भुत अलौलिक संरचना बेजोड़ योग स्त्री पुरूष..... दोनों की एक दूसरे के स्वभाव के विपरीत पर एक दूसरे के पूरक ❤️ जहां एक स्त्री कोमल ममतामयी वहीं पुरुष यथार्थ के धरातल से जुड़ा कठोर भावनाओं को अपने अंदर समेटे हुए ...तभी तो स्त्री उन्मुक्त विचरती है और इस जगत के निर्माण में सक्षम है....एक दूसरे के बिना दोनो ही अपूर्ण है....

पुरुष यानी .........????? (एक अनसुलझा सवाल )
स्त्री.........??????  ( एक पहेली )

सच कहूं तो बहुत से व्याख्यान भरे पड़े हैं स्त्री की गाथा में ... स्त्री के नख शिख वर्णन हर जगह पढ़ने को मिल जायेगा ...
पर उसमें पुरूष कहाँ है...??  सच सब जानते हैं ..... और मानते भी हैं ... कि दोनों एक दूसरे के पूरक हैं... पर फिर भी...पुरुष को समझा कौन....?? यदा कदा की बात छोड़ दे तो .... कहां मिलता है पुरुष का वर्णन....
       पुरुष की प्रकृति धीर गम्भीर है... पर सीने में दिल धड़कता है... भावनाओं का समुन्दर उमड़ता हैं... हिलोरें लेती हैं उसके भी मन में कोमल भावनाएं ...वो पत्थर है पर.....पर कठोर नहीं.... क्योंकि प्रेम का झरना भी वहीं से फूटता है... ख्याब बुनना सपने संजोना..सजल होना ...सब तो है.. पुरुष में...हम स्त्रियों जैसा..

कभी भी कहीं भी पुरुष द्वारा  पुरुष के लिए कुछ लिखा  गया है.... परंतु एक स्त्री पुरुष को किस नजरिए से देखती है..... पुरुष के मनोभावों को समेटते है... 

एक स्त्री के नज़रिये से देखें तो....
वास्तविकता थोड़ी ज्यादा नज़दीक होती है.......

पुरुष यानि कि ...
पत्थर में अंकुरित  कोपल....

पुरुष  मतलब ...
लोहे के सीने के पीछे ...
धक धक करता कोमल ह्रदय ...

पुरुष यानि कि....
किसी कोयल की कूक  ढ़ूँढता एक मूक वृक्ष ....

पुरुष मतलब...
वो बट बृक्ष जो एक स्थान पर खड़ा
छाँव देता है....

पुरुष कहता  है कि...
" आज मूड नहीं  है,
 दिमाग़  ठिकाने नहीं  है...."
पर, शायद  ही कहेगा कि
आज मन उदास है......

सबको ढाढस बंधाता खुद टूट कर
अपनी  आंखों के बांध को कभी टूटने नहीं देता
वक्त आने पर बीबीएन जाता है
सुखा पोखर ....

स्त्री ....
पुरुष के कंधे पर सर रखकर रो लेती  है....
जब कि, पुरुष 
स्त्री की गोद में सर रखकर रो लेता है.......

जिस तरह दुनियाभर की स्त्रियों को...
अपने  पुरुष के शर्ट पे बटन लगाने में जो रोमांच  होता है....
वही  रोमांच उसी वक्त  स्त्री को 
गले लगाने में
पुरुष को होता है.......

जीतने के लिए पैदा हुआ पुरुष ...
प्यार के पास  हार जाता है....
और जब.....
वो प्यार  छोड़ जाता है ना
तब
वह जड़ समेत  उखड़ जाता है....

स्त्री की मजबूरी सह जाता है.... 
जैसे  तैसे भी....
मगर,
बेवफाई  सह नहीं  पाता.....
उसका.....  या खुद का..... 
दुश्मन बन जाता है.........

धंधे में लाखों का घाटा सह जाता है
भागीदारी में दगा नहीं सह पाता ....

समर्पण स्त्री का स्वभाव है.....
और पुरुष की हार्दिक कामना .......

स्त्री के आँसू  अंधेरे में भी 
दिखते है.....
पुरुष के  आँसू 
उसके तकिये को भी नहीं दिखते ...

कहते  है 
स्त्री को चाहते रहो,
समझने की ज़रूरत नही.......
मैं कहती  हूँ :  
पुरुषको  बस.. समझो....... 
अपने आप चाहने लगेगा  तुम्हें ....

जहां तक समझा है मैने...
स्त्री यदि गंगा जल है
तो पुरुष सहज भाव से समेटे हुए 
जल का दरिया 

स्त्री समर्पित है तो 
पुरुष समर्पण ...

सच कहूं तो
बस पुरुष तो पुरूष है...
एक कठोर आवरण पहने हुए ..
सशक्त प्रहरी ....

Dr नीलम गुप्ता "नीरा"

शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

शीशा

बहुत दिनों से घर के कोने में रखा
वो शीशा 
वक्त की गर्द से  धुंधल सा 
अचानक आज सामने आ गया 
ढेरों सवालों के पुलिंदे लिए

और 
मैं पहुंच गई स्मृतियों की घाटी में
जहां संगीत था निर्झर झरने में 
तो सूखे पत्तों में भी 
हर कण कण झूमता सा था 
पर सब गुजरा जमाना हुआ
और ...आज
वहां हरी मखमली घास में 
उगी हुई थी ढेरों शैवाल..
अनवरत कोशिश के बाद भी
रह ही जाते हैं शैवाल के निशां

हर मौसम में 
पंछी कूंजते हैं सुनाते हैं धुन
और... मै
कभी सुना तो कभी अनसुना कर 
बड़ जाती हूं बोझिल कदमों से आगे
शायद 
आईने के सवालों से बचने के लिए 
नहीं करना चाहती मै उन
 अनसुलझे सवालों का सामना
मालूम है मुझे... कि
आईने की गर्द में दफन है...
एक इतिहास

अब मै नहीं दोहराना चाहती इतिहास
नहीं देखना चाहती आईने में तुम्हारा अक्श
जिसमें...
मेरा अंतर्मन  भीग जाए 
मुझे अब ना होगा 
उस बरसात का सामना ...
अनकहे मन से कहती हूं
अब बरसात नही अच्छी लगती मुझे..

Dr नीलम गुप्ता " नीरा"

सुनो...
तुम कोरे कागज पर लिखते जाओ कुछ  हर्फ
और ....मैं 
लपेटती जाऊं उन्हें अपने अंतर्मन में
द्रौपदी के चीर की तरह

खो जाऊं उनमें ...मीरा की पीर की तरह
और तुम्हारे हर हर्फ में हर्फ बन समा जाऊं

तुम रंगते जाओ उस कोरे कागज को
और ... मै 
रंगती जाऊं राधा की तरह 
हर हर्फ में...
हो जाऊं ....एकाकार हर्फ के हर हर्फ में...

बस तुम...
लिखते जाओ...
जिसमे मेरा रोम रोम 
डूब जाए अनंत होने के लिए ....

नीलम गुप्ता " नीरा"

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

मेरी तमन्ना

स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी...!
एक नन्हा -सा चिराग जलाने की तमन्ना है...!!

तंग गलियों में जो पसरा हुआ सन्नाटा सा है...!
उसमें हल्की सी सुगबुगाहट लाने की तमन्ना है...!!

अधढके तन में जो घूम रहा नन्हा कल का भविष्य...!
उसके तन को ढापने की बड़ी तमन्ना है...!!

सोता है जो खाली पेट केवल पानी पीकर फुटपाथ पर...!
उसके लिए इक कौर निवाला मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

 मासूम से चेहरों पर जो लिपटी पड़ी है उदासी की चादर...!
उसको समेट मुस्कुराहट लाने की तमन्ना है...!!

ललचाई सी निगाहों से जो देख रहे टुकुर-टुकुर ...!
उनको आंशियाँ मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

भोर सी चमक...रात सी चाँदनी रहे सबके चेहरों पर...!
ये ख्वाहिश भी है तहेदिल से मेरी ...
बस यही इक " तमन्ना " पूरी करने की " तमन्ना " है मेरी ...!!

# नीलम " नीरा "

स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी

 स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी...!

एक नन्हा -सा चिराग जलाने की तमन्ना है...!!

तंग गलियों में जो पसरा हुआ सन्नाटा सा है...!

उसमें हल्की सी सुगबुगाहट लाने की तमन्ना है...!!

                         अधढके तन में जो घूम रहा नन्हा कल का भविष्य...!

                          उसके तन को ढापने की बड़ी तमन्ना है...!!

                          सोता है जो खाली पेट केवल पानी पीकर फुटपाथ पर...!

उसके लिए इक कौर निवाला मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!! 

मासूम से चेहरों पर जो लिपटी पड़ी है उदासी की चादर...!

उसको समेट मुस्कुराहट लाने की तमन्ना है...!!

ललचाई सी निगाहों से जो देख रहे टुकुर-टुकुर ...!

                                     उनको आंशियाँ मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

                              भोर सी चमक...रात सी चाँदनी रहे सबके चेहरों पर...!

ये ख्वाहिश भी है तहेदिल से मेरी ...बस यही इक " तमन्ना " पूरी करने की " तमन्ना " है मेरी ...!!# नीलम " नीरा "