शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

सुनो...
तुम कोरे कागज पर लिखते जाओ कुछ  हर्फ
और ....मैं 
लपेटती जाऊं उन्हें अपने अंतर्मन में
द्रौपदी के चीर की तरह

खो जाऊं उनमें ...मीरा की पीर की तरह
और तुम्हारे हर हर्फ में हर्फ बन समा जाऊं

तुम रंगते जाओ उस कोरे कागज को
और ... मै 
रंगती जाऊं राधा की तरह 
हर हर्फ में...
हो जाऊं ....एकाकार हर्फ के हर हर्फ में...

बस तुम...
लिखते जाओ...
जिसमे मेरा रोम रोम 
डूब जाए अनंत होने के लिए ....

नीलम गुप्ता " नीरा"

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