बुधवार, 19 जनवरी 2022

मैं और तुम

कहानी 
मैं और तुम की

एक अनजान सा ...मैं
अनायास  टकरा गया ...तुम से

बस यूँ ही 
सफर जारी रहा
कुछ सामान्य सी 
हल्की मुलाकात

समय बीता
 मुलाकात गहरी हुई
 मैं और तुम  कुछ करीब आये

बस वक्त ने करवट बदली
कुछ फिजा में खुमारी ,
कुछ हंसी लम्हे.... कुछ पल
बस 
पंख लग गए सपनों को

और
मैं और तुम 
हम बन गए
उड़ने लगा वक्त 
परियो के देश 
आसमाँ  मौसम दिन रात 
सब मचलने लगे...
आगोश में आने को....

वक्त बीता
मौसम बदले 
सावन आया ,बसन्त आया 
उमस और तपाने वाली गर्मी 
फिर सर्द हवाएं  
और हर तरफ जमने लगा हिम

एक अन्तराल  

 मौसम दर मौसम बदलते गए
कौन रोक पाए है बदलते मौसम को
खुलने लगे बाहुपाश में बंधे बन्धन 
सिमट गया आसमान ,सारा जहाँ
और
बिखर गया हम 
वक्त ने फिर से  अपना रंग बदला 
रंगीन तस्वीर के रंग फीके पड़ने लगे 
बन्धन को बंधना खलने लगा 
सारे सपने सपने से हो गए ....

इसको
वक्त कहूँ या मौसम 
आहिस्ता से 
"हम "
फिर से 
"मैं" और  "तुम"  हो गया
एक रास्ते में फिर से 
एक मोड़ आ गया 
राहें एक से दो हो गयीं.....
डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

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