शनिवार, 7 जून 2025

Ankur

तुम मुझे अखबार जैसे पढ़ोगे
तो रद्दी हि समझोगे।
अगर तुम किताब जैसे पढ़ो
तो मेरी किमत पता चले।
............@dhul 

जिंदगी

हँसता हुआ, 
एक दिन जहां मे बिखर जाऊँगा 
ये न पुंछो बिखर कहा जाऊँगा ।
मेरा कतरा कतरा इस जहां पर होगा
पर उन कतरो मे कोई मुझे नही पायेगा ।