शनिवार, 7 जून 2025

जिंदगी

हँसता हुआ, 
एक दिन जहां मे बिखर जाऊँगा 
ये न पुंछो बिखर कहा जाऊँगा ।
मेरा कतरा कतरा इस जहां पर होगा
पर उन कतरो मे कोई मुझे नही पायेगा । 

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