शुक्रवार, 26 अगस्त 2022
शीशा
गुरुवार, 28 जुलाई 2022
मेरी तमन्ना
स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी
स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी...!
एक नन्हा -सा चिराग जलाने की तमन्ना है...!!
तंग गलियों में जो पसरा हुआ सन्नाटा सा है...!
उसमें हल्की सी सुगबुगाहट लाने की तमन्ना है...!!
अधढके तन में जो घूम रहा नन्हा कल का भविष्य...!
उसके तन को ढापने की बड़ी तमन्ना है...!!
सोता है जो खाली पेट केवल पानी पीकर फुटपाथ पर...!
उसके लिए इक कौर निवाला मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!
मासूम से चेहरों पर जो लिपटी पड़ी है उदासी की चादर...!
उसको समेट मुस्कुराहट लाने की तमन्ना है...!!
ललचाई सी निगाहों से जो देख रहे टुकुर-टुकुर ...!
उनको आंशियाँ मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!
भोर सी चमक...रात सी चाँदनी रहे सबके चेहरों पर...!
ये ख्वाहिश भी है तहेदिल से मेरी ...बस यही इक " तमन्ना " पूरी करने की " तमन्ना " है मेरी ...!!# नीलम " नीरा "
गुरुवार, 16 जून 2022
चाय
चाय....
शनिवार, 4 जून 2022
काँटे
सोमवार, 30 मई 2022
सजीवनी बूटी
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मुकम्मल मेरा जहाँ है माँ यहाँ है माँ,वहाँ है माँ छोटी सी है दुनिया सारा जहाँ है माँ जहां हूँ मैं...
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पीड़ा मिली जनम के द्वारे अपयश नदी किनारे इतना कुछ मिल पाया एक बस तुम ही नहीं मिले जीवन में हुई दोस्ती ऐसी दु:ख से हर मुश्किल बन गई रुबाई,...
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बहुत दिनों बाद खुला आसमान! निकली है धूप, खुश हुआ जहान! दिखी दिशाएँ, झलके पेड़, चरने को चले ढोर--गाय-भैंस-भेड़, खेलने लगे लड़के छेड़-छे...