शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

शीशा

बहुत दिनों से घर के कोने में रखा
वो शीशा 
वक्त की गर्द से  धुंधल सा 
अचानक आज सामने आ गया 
ढेरों सवालों के पुलिंदे लिए

और 
मैं पहुंच गई स्मृतियों की घाटी में
जहां संगीत था निर्झर झरने में 
तो सूखे पत्तों में भी 
हर कण कण झूमता सा था 
पर सब गुजरा जमाना हुआ
और ...आज
वहां हरी मखमली घास में 
उगी हुई थी ढेरों शैवाल..
अनवरत कोशिश के बाद भी
रह ही जाते हैं शैवाल के निशां

हर मौसम में 
पंछी कूंजते हैं सुनाते हैं धुन
और... मै
कभी सुना तो कभी अनसुना कर 
बड़ जाती हूं बोझिल कदमों से आगे
शायद 
आईने के सवालों से बचने के लिए 
नहीं करना चाहती मै उन
 अनसुलझे सवालों का सामना
मालूम है मुझे... कि
आईने की गर्द में दफन है...
एक इतिहास

अब मै नहीं दोहराना चाहती इतिहास
नहीं देखना चाहती आईने में तुम्हारा अक्श
जिसमें...
मेरा अंतर्मन  भीग जाए 
मुझे अब ना होगा 
उस बरसात का सामना ...
अनकहे मन से कहती हूं
अब बरसात नही अच्छी लगती मुझे..

Dr नीलम गुप्ता " नीरा"

सुनो...
तुम कोरे कागज पर लिखते जाओ कुछ  हर्फ
और ....मैं 
लपेटती जाऊं उन्हें अपने अंतर्मन में
द्रौपदी के चीर की तरह

खो जाऊं उनमें ...मीरा की पीर की तरह
और तुम्हारे हर हर्फ में हर्फ बन समा जाऊं

तुम रंगते जाओ उस कोरे कागज को
और ... मै 
रंगती जाऊं राधा की तरह 
हर हर्फ में...
हो जाऊं ....एकाकार हर्फ के हर हर्फ में...

बस तुम...
लिखते जाओ...
जिसमे मेरा रोम रोम 
डूब जाए अनंत होने के लिए ....

नीलम गुप्ता " नीरा"

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

मेरी तमन्ना

स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी...!
एक नन्हा -सा चिराग जलाने की तमन्ना है...!!

तंग गलियों में जो पसरा हुआ सन्नाटा सा है...!
उसमें हल्की सी सुगबुगाहट लाने की तमन्ना है...!!

अधढके तन में जो घूम रहा नन्हा कल का भविष्य...!
उसके तन को ढापने की बड़ी तमन्ना है...!!

सोता है जो खाली पेट केवल पानी पीकर फुटपाथ पर...!
उसके लिए इक कौर निवाला मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

 मासूम से चेहरों पर जो लिपटी पड़ी है उदासी की चादर...!
उसको समेट मुस्कुराहट लाने की तमन्ना है...!!

ललचाई सी निगाहों से जो देख रहे टुकुर-टुकुर ...!
उनको आंशियाँ मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

भोर सी चमक...रात सी चाँदनी रहे सबके चेहरों पर...!
ये ख्वाहिश भी है तहेदिल से मेरी ...
बस यही इक " तमन्ना " पूरी करने की " तमन्ना " है मेरी ...!!

# नीलम " नीरा "

स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी

 स्याह अंधेरों में जुगनुओं से कहाँ होती है रोशनी...!

एक नन्हा -सा चिराग जलाने की तमन्ना है...!!

तंग गलियों में जो पसरा हुआ सन्नाटा सा है...!

उसमें हल्की सी सुगबुगाहट लाने की तमन्ना है...!!

                         अधढके तन में जो घूम रहा नन्हा कल का भविष्य...!

                          उसके तन को ढापने की बड़ी तमन्ना है...!!

                          सोता है जो खाली पेट केवल पानी पीकर फुटपाथ पर...!

उसके लिए इक कौर निवाला मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!! 

मासूम से चेहरों पर जो लिपटी पड़ी है उदासी की चादर...!

उसको समेट मुस्कुराहट लाने की तमन्ना है...!!

ललचाई सी निगाहों से जो देख रहे टुकुर-टुकुर ...!

                                     उनको आंशियाँ मुहैय्या कराने की बड़ी तमन्ना है...!!

                              भोर सी चमक...रात सी चाँदनी रहे सबके चेहरों पर...!

ये ख्वाहिश भी है तहेदिल से मेरी ...बस यही इक " तमन्ना " पूरी करने की " तमन्ना " है मेरी ...!!# नीलम " नीरा "

गुरुवार, 16 जून 2022

चाय

चाय....


एक छोटा सा शब्द चाय....कितना गहरा है ...कितना कुछ समेटे हुए हैं ..अपने में....इत्तु सी चाय ...बदल देती है दुनिया...  प्यार सम्मान अपनापन... स्नेह दुलार  मनुहार  एक मधुर अहसास ..सुकून... यारी दोस्ती...क्या कुछ नहीं है...चाय में....
सच कहूँ तो....एक कप चाय ...पूरी की पूरी महफिल है.... जिंदगी का सार है.... अब आप कहेंगे ...जिन्दगी का सार.... हाँ ...सार.. पी कर तो देखिए ..एक कप चाय दोस्तों संग... उस अहसास से लबरेज हो जाएंगे आप ... जिनको सिर्फ महसूस किया जा सकता है... जिनको व्यक्त करने के लिए शब्द ही नहीं बने.... अद्भुत अहसास
    एक कप चाय ...से लौट आती है जिन्दगी.... पुरानी यादें... बचपन की  अठखेलियाँ...  और नए पुराने दोस्त...वो प्यार भरी मीठी बातें.... वो शिकवे शिकायतें...
 
इस भगदौड़ भरी...जिन्दगी में... सुकून है चाय...सर दर्द हो या हो मन उदास...तन्हाई हो या हो  अकेलापन ... जीवन का खालीपन.. सब डूब जाते हैं ...चाय के उस  छोटे से प्याले में... पी कर तो देखिए .... कभी आँखे नम तो कभी मुस्कुरा जाती हैं आँखे... एक कप चाय से 

 सबसे बड़ी बात ...खाली बैठे हो ...तो एक कप चाय  से अच्छा कोई विकल्प ही नहीं है समय बिताने का....सर्द मौसम हो या तपती धूप या फिर रिमझिम बरसात ...चाय   का अलग ही आनन्द है.... बरसात हो और चाय संग पकौड़े... फिर तो बस परम् आनन्द....

 अब क्या ही कहूँ.... एक कप चाय ...वो भी दोस्तों संग अपनों संग...उदास जिन्दगी में रंग भर देती है... गोरी हो या काली चाय...  मीठी हो या फीकी ....सब के चेहरे गुलाब कर देती है... चाय...
तो चलिए ...हो जाये ....एक कप चाय ☺️

डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

शनिवार, 4 जून 2022

काँटे

छोटी थी ...तब सोचती थी कि गुलाब इतना प्यारा सा ....
इतनी भीनी खुशबू....हर रंग में मनमोहक... जरा सा प्यार से सहलाओ तो ....उसकी महक से सारा फिजा महक जाए ...पर फिर उसमें कांटे क्यों होते हैं....?? 
उलझी ही रहती ...
बालमन ऐसा ही होता है.... जो हर बात में सवाल..और वो भी अनगिनत.... कुछ तो बेसिरपैर के ....

लेकिन...
तब तो नहीं....
पर अब समझ आया कि...
हर सवाल का जबाब होता है.... सवाल कभी बेसिरपैर के नही होते ....कोई ना कोई  तथ्य होता ही है...हर सवाल जबाब का....
अब गुलाब को ही देखो ....अपनी भीनी महक से सबका दिल मोह लेते हैं...
चाहे सुंदरी के बालों में लगे या किसी को नेह वश दो या सुहाग सेज सजी हो ...
हर जगह अलग महत्व...पर साथ में काँटे ...??
काँटे वो भी फिजूल कहाँ होते हैं...
हर जगह एक संदेश तो देते हैं.... जहाँ गुलाब है वहाँ काँटो से सावधान रहो... ये काँटे ही ये सन्देश देते हैं... कि  जहाँ ख़ुशी है वहाँ जनझावत भी है...
एक बात और....
गुलाब में कांटे इसलिए  भी होते हैं... जिससे कोई उसे झटके से तोड़े तो ...लहूलुहान कर काँटे उसे जता दें कि गुलाब अकेला नहीं है... उसके भी पहरेदार हैं...
सच कहूँ तो...बिना काँटो का गुलाब अच्छा ही नहीं लगता....

गुलाब है जनाब आहिस्ता से सहेजिये...
 किताबों में रखे गुलाब जब भी मिलते हैं... हर बार ताजा ही होते हैं....

# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

सोमवार, 30 मई 2022

सजीवनी बूटी

संजीवनी बूटी

जी हाँ जरुरत होती है....उम्र पर
संजीवनी बूटी की सभी को.....

जहाँ बंद हो जाते हैं सारे रास्ते....
और..
  खड़ी हो जाती है जिन्दगी एक ऐसे दोराहे पर
जब....
 ये जानी पहचानी गलियां लगती हैं बेगानी सी
फिर.....
 जिन्दगी के सफर में सिर्फ तलाश रहती है
इक अदद सुकून की...
और.....
तब मिल जाते हैं ... कुछ दोस्त खड़े हुए 
उम्मीद से अपनी बाँहे फैलाये.... 
मीठी मुस्कान लिए... थामने को डगमगाते हुए कदम
वही दोस्त.....
जो खोल देते हैं जिन्दगी का वो रास्ता 
जहाँ फिर से शुरू होता है एक नया सफर ....
  सच कहा....
नया सफर नया रास्ता बेफिक्री का बेपरवाह सा...अलबेला
और फिर....
 फिर से शुरू हो जाती है जिन्दगी की नई पारी....
दोस्तों संग ...
जहाँ सारे रिश्ते नाते ताक पर रख ....
फिर से जी लेते हैं हम जिन्दगी की अनूठी पारी
और फिर....
चल पड़ती है जिन्दगी.... 
चुलबुले नटखट और शरारती दोस्तों संग ...
अनजानी राह पर....
 सच कहूँ तो....
दोस्त सजीवनी बूटी होते हैं.....
जो जिंदादिली से जीना सिखाते हैं...☺️

 एक बात और कहूँगी दोस्तों....
दोस्तों में कोई उम्र नही होती ...
जब दोस्ती होती है तो सब हमउम्र हो जाते हैं....
तभी तो संजीवनी बूटी होते हैं ये ....
बिंदास दोस्त

# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"