छोटी थी ...तब सोचती थी कि गुलाब इतना प्यारा सा ....
इतनी भीनी खुशबू....हर रंग में मनमोहक... जरा सा प्यार से सहलाओ तो ....उसकी महक से सारा फिजा महक जाए ...पर फिर उसमें कांटे क्यों होते हैं....??
उलझी ही रहती ...
बालमन ऐसा ही होता है.... जो हर बात में सवाल..और वो भी अनगिनत.... कुछ तो बेसिरपैर के ....
लेकिन...
तब तो नहीं....
पर अब समझ आया कि...
हर सवाल का जबाब होता है.... सवाल कभी बेसिरपैर के नही होते ....कोई ना कोई तथ्य होता ही है...हर सवाल जबाब का....
अब गुलाब को ही देखो ....अपनी भीनी महक से सबका दिल मोह लेते हैं...
चाहे सुंदरी के बालों में लगे या किसी को नेह वश दो या सुहाग सेज सजी हो ...
हर जगह अलग महत्व...पर साथ में काँटे ...??
काँटे वो भी फिजूल कहाँ होते हैं...
हर जगह एक संदेश तो देते हैं.... जहाँ गुलाब है वहाँ काँटो से सावधान रहो... ये काँटे ही ये सन्देश देते हैं... कि जहाँ ख़ुशी है वहाँ जनझावत भी है...
एक बात और....
गुलाब में कांटे इसलिए भी होते हैं... जिससे कोई उसे झटके से तोड़े तो ...लहूलुहान कर काँटे उसे जता दें कि गुलाब अकेला नहीं है... उसके भी पहरेदार हैं...
सच कहूँ तो...बिना काँटो का गुलाब अच्छा ही नहीं लगता....
गुलाब है जनाब आहिस्ता से सहेजिये...
किताबों में रखे गुलाब जब भी मिलते हैं... हर बार ताजा ही होते हैं....
# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"
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