जिम्मेदार कौन....
जी हाँ कौन जिम्मेदार है बच्चों को बिगाड़ने में.. मेरे जेहन में ये सवाल उस वक्त उठा... जब मैं सुबह सुबह उन बच्चों को देख रही थी जो स्कूल बस से स्कूल जा रहे थे और कुछ बच्चे पास ही स्कूल में पैदल ही जा रहे थे...
मेरे घर के सामने से अधिकतर सभी स्कूलों की बसें निकालती हैं ...इसलिए मैं अधिकतर बच्चों के स्कूल जाने और आने के वक्त गेट से बाहर आ ही जाती हूँ... बच्चों की चहल पहल किसका दिल नहीं मोह लेती...
हाँ तो मैं वही बता रही थी कि बच्चों को बिगाड़ने में माँ और पिता का ही हाथ रहता है .....ये बात कुछ लोगों को बुरी और अटपटी जरुर लगेगी ..पर मेरे नजरिये से मुझे तो सही लगी... क्योंकि मैं लगभग रोज ही देखती हूँ बच्चे स्कूल जा रहे होते हैं और उनके माता पिता कंधे पर उनका स्कूलबैग लादे होते हैं... और बच्चा शैतानी करता हुआ बेफिक्र चलता है...
आज जब एक ऐसे ही माँ को बोला..... तो उनका जबाब था...बैग भारी है..ये थक जाएगा...
मुझे जबाब अजीब लगा पर आदतानुसार
फिर मैंने कहा .. आप स्वंय ही अपने बच्चे को बिगाड़ रही हैं... उसे उसकी जिम्मेदारी तो उठाने दीजिये..कल तो फिर आप ही कहेंगी ...
मैं सोचने पर विवश हो गयी और तभी लगा जब हम अपने छोटे बच्चों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास ही नहीं कराएंगे तो वो नासमझ समझेंगे कैसे....वो तो वही समझेंगे जो हम समझाएंगे...
ये बात ठीक है कि हमारा अतिशय स्नेह होता है बच्चों पर
तो क्या हम उनको उनके काम से अलग कर दें...
ईश्वर में हमें माता पिता बना कर बहुत बड़ा दायित्व सौंपा है..तो हमारा भी फर्ज बनता है कि अपने बच्चों को एक अच्छी परवरिश के साथ जिम्मेदारी उठाना भी सिखाएं...
आज वो छोटा सा स्कूल बैग उठाएंगे ...ऐसे ही धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे...
बच्चों को प्यार स्नेह दुलार भरपूर दीजिये पर अच्छी शिक्षा भी दीजिये ..क्योंकि यही छोटी छोटी बातें आगे चलकर फायदेमंद या नुकसानदेह हो सकती है...
तभी तो कहा है ...बच्चे की पहली पाठशाला घर है और पहले गुरु माता पिता☺️