शनिवार, 16 मई 2020

अच्छ सा पैगाम आये-राजन विघार्थी

हर कोई चाहता है ,अच्छा सा पैगाम आये
दो पल जिन्दगी में आराम आये
धूप जाये छाँव आये
दिल की बात दिलावर मान जाये
किसान भी चाहता है
बाजरे के अच्छे दाम आयें
तो खूबियां बताओ ऎसे
बाजरा भी किसी काम आये/
               वो चाहता है सबकी मान जाये
           पर सबका मकसद तो उसकी जान आये
           वो मरना भी चाहता है 
          इससे पहले की अमरनाथ पहलगाम जाये
         पर मौत भी तो किसी के काम आये 
         पर मौत भी तो किसी के काम आये  
         बदनाम हो तो हो जाये 
        यदि बदनामी से मोहबब्त मिल जाये
          
राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
Written-06- 06-13

शीशे मे उतार के देखा-राजन विघार्थी

मैंने खुद को शीशे में उतार के देखा
मौत से पहले खुद को मार कर देखा
एकबार नहीं,हजार बार बिचार के देखा
शीशे के पार कुछ मिलता नही हैं
मौत के पार कोई टिकता नही है
फिरभी शीशे के पार खूबसूरती ढूँढते हैं
मौत के बाद सुकून की मूरती ढूँढते 
शीशे कब टूटे पता नहीं है
जिन्दगी कब रूठे पता नहीं है
शीशे में बस किसी की सूरत दिखा सकते हैं
मौत की झुँठी शुभ मुहरत बता सकते हैं
मिल जाये जिन्दगी का यतार्थ तो 
मौत को जिन्दगी से भी खूबसूरत बना सकते हैं////
 राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
Written-06-08-13

चाँद और रात-राजन विघार्थी

काली-काली घटा छाई
रात बढ. आई झुक-झुक कर
एक पृकाश का दीपक उसमें
उजियारा करता है रूक-रूककर
चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, खड़े रहना                                                                                                                                                               
          रात-रात भर रूककर चंदा
          दुनिया में उजेला करता है
         रात-रात भर रूककर चंदा
         कितनी मेहनत करता है
                        न ठण्डी न गर्मी से डरता
                       इनकी वह परवाह न करके
                        नित-नित आगे बढ़ता है
                 ठिठुर-ठिठुर कर आकाश में
                चंदा सुखद चाँदनी करता है
रात-रात भर रूककर
कितनी मेहनत करता है/
    
(राजन विघार्थी)
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
Written-12/02/2007

तीर है कमान है--- राजन विघार्थी

चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
हैं सब माहिर निशानेबाज,
सबपे तीर है कमान है
निहत्था इस.जमाने में मैं हूँ
यहां सबके सब धुरंधर हैं
और धुरंधरों के निशाने पे मैं हूँ
यहां सब करते हैं फसाद
चेहरा हर फसाने का मैं हूँ
कोई बाघ,कोई चीता,कोई शेर है
मेमना अकेला इस जमाने मैं हूँ

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 2 लोग, मुस्कुराते लोग, धूप के चश्मे, सेल्फ़ी और क्लोज़अप

                                राजन विघार्थी

पानी हूँ मैं- राजन विघार्थी

पानी हूँ मैं,पानी हूँ मैं,पानी हूँ मे़ैं
अविरलता की एक कहानी हूँ मैं
हवा में हूं मैं,फिजा में हूं मै
समुद्र मे हूं मैं,आंख में हूं मैं
पानी हूं मैं,पानी पानी पानी
सारा जग ढूंढ रहा है पानी पानी पानी पानी.........
चट्टानों सा अडिग नही मैं
हवाओं सा चलित नही मैं
जब - जब मैं बहा वेग से 
बड़ी-२ चट्टाने टूटी ,भांवनाओं की लहरे फूटीं
चलना मेरा काम है,इसलिए रूका नहीं मैं
गहराई मुझे बहुत पसन्द है
पर किसी के आगे झुका नहीं मैं./////
 राजन विघीर्थी

आपकी खुदाई आपके पास-राजन विघार्थी

आपकी खुदाई आपके पास,           
 मेरी खुद्दारी मेरे पास।
आपको मुबारक अकबर जैसी लाइफ
      हम जीलेंगे राणा की तरह ही खाके  घास।।
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है

हर मोड़ पे-गम कुछ ज्यादा रहा- राजन विघार्थी

मुझको मत पढ़ो
नीरस छन्द हूँ मैं
याद रहे तुम्हारे भीतर 
अनवरत चलने वाला द्वन्द हूँ मैं
न बन्धनों ९से बंधा हूँ
न दबावों मे दबा हूं
आजाद हूँ,स्वछन्द हूँ मैं
याद रहे तुम्हारे भीतर
अनवरत चलने वाला द्वन्द हूँ मैं////
       हर मौसम हर छढ़ अणां मिलूंगा
      हर मोड़ पे जीवन के खड़ा मिलूंगा
     अमीर को मिलूंगा ,गरीब को मिलूंगा
     गद्दारी, मक्कारी ,कमीने पन में मिलूंगा
     सराफत के बिस्सतर परभी  पड़ा मिलूंगा
        हर मोड़ पे जीवन के खडा़ मिलूंगा//////
                   
           दिल की बात by   राजन विघार्थी