शनिवार, 16 मई 2020

सोन चिरैया-राजन विघार्थी

1.आंगन सूना बिन सोन चिरैया,
सन्नाटा करे किलकारी
जहं रहवे खुश रहवे
सोन चिरैया हमारी//
                 नम आंखो से आंगन छोड़ा
            नई आस से नाता जोड़ा
            कुछ खुशियां,कुछ गमों के संग
          उसने मेरा दामन छोड़ा////
सोन सी चमके मेरी सोन चिरैया
आंगन चमके सुन किलकारी
विवेकान्नद सा व्यकतित्व चमके
अनुसुइया सी चमके कहानी 
दुवा यही है खुदा से अपनी
लक्छीबाई सी बने मरदानी// 
          सोन सी चमके मेरी सोन चिरैया   
           आंगन चमके सुन किलकारी
           जंह रहवे खुश       रहवे
        सोन चिरैया हमारी      ///
   
राजन विघार्थी
26/04/17

पीने वाला चला गया-राजन विघार्थी

हस- हस कर गमों को सीने वाला चला गया
यारो पीने वाला चला गया,यारो पीने वाला चला गया
साकी रोती है,रोते हैं सब मैखाने
वो किस तहखाने में चला गया
यारो पीने वाला चला गया,यारो पीने वाला चला गया
रो रही है बोतल,रो रहें है प्याले
मेरे संग-संग जीने वाला चला गया
यारो पीने वाला चला गया,यारो पीने वाला चला गया
राजन विघार्थी

फिर काहे हांजी-हांजी-राजन विघार्थी

न हम राजी न तुम राजी,
     फिर काहे हांजी-हांजी
         न तुम हारो बाजी
                 न हम हारें बाजी
                      मार भगाओ फिर काजी
                       फिर काहे हांजी -हांजी///
प्यार मैं स्नातक ,प्यार में तुम हो दादी
निकाह कराता घूमे,अनपढ़ साला काजी
प्यार नहो सच्चा तो कर जाता साला बादी
न हम राजी न तुम राजी,तो मार भगाओ काजी
                 फिर काहे हांजी-हांजी////
        तुम चाहो आजादी,हम चाहेंआजादी
तुमअपने आप में खुश,हम फक्कड़पन के आदी
           न तुम्हे पसन्द बर्बादी,न हमें पसन्द बर्बादी
                फिर तोड़ दो साली सादी
                        हम राजी  तुम राजी
                             फिर काहे हांजी- हांजी///
राजन विघार्थी

हर आंख में ख्वाब है-राजन विघार्थी

हर आंख मे ख्वाब है
    हर चेहरे पर नकाब है
        नवाब हो एक जहां के 
              आप का क्या जवाब है////
                   कुछ कमी रह गयी पृयासों
                    जो अपना बिगड़ा हुआ आज है/
इक आस के सहारे दुनिया चल रही है
   सपना हकीकत करने को 
    हर जवानी मचल रही है
      क्यों खुदगर्जी के सहारे दुनिया चल रही है
              किसीके ही सहारे क्यों किस्मत बदल रही है///
        हर हकदार को मन्जिल मिलनी चाहिए
      बखेड़ा करना मेरा मक्सद नहीं 
    अपने ही हाथों अपनी किस्मत बदलनी चाहिए
  हर आस को सांच मिलना चाहिए
                  इतनी तो आपकी जिम्मेवारी थी
                     मेरे गुरूओ 
                    हर शिष्य को राह दिखनी चाहिए
राजन विघार्थी

ऐसी भी इबादत रख्खे-राजन विघार्थी

जिनके खून में खुद्दारी है,
उनको भी सलामत रख्खे
मेरी दुवा है ,
खुदा तुमको भी सलामत रख्खे
देश काम आये जिन्दगी आपकी
दुवा है खुदा ऐसी भी इबादत रख्खे///
राजन विघार्थी

क्यों विष निकल पड़ा--राजन विघार्थी

भूखा रहा बुजुर्ग,आन्दोलन करता रहा
हर आन्दोलन से चोर-उचक्का निकलता रहा
रह रह कर समुदृ मन्थन चलता रहा
कभी केजरी- कभी लालू बनके जहर निकलता रहा/
जेपी ने दी आहुत लालू निकल पड़ा
           अन्ना ने दी आहुत केजरी निकल पड़ा
                 आहुत थी अमृतके लिए
                        हर दफा क्यों विष निकल पड़ा
भगवान की भीड़ में राहू निकल पड़ा///
                भैंसो का चारा लालू खा गया
           इनसानियत जो बची थी
केजरी बिचारा खा गया
ऊब गयी जनता तो
       राज भगवा  गया/////
          राजन विघार्थी
          14/04/17

बचपन बीता है अभी-२--राजन विघार्थी

बचपन बीता है अभी-अभी,बाकी अभी जवानी है
वक्त अभी तो सुरु हुआ है,बाकी अभी कहानी है
तेरी आंखो में पानी है,मेरी आँखो में भी पानी है
आस्तीन में है साँप पल रहा,घर की यही कहानी है
किस्मत बदलेगी देश की यारो,हवा अभी वो आनी है
देश के खातिर बह न सका वो खून नही वो पानी है
बचपन बीता है अभी-अभी,बाकी अभी जवानी है
नायिका तक है सीमीत,हर नायक की यही कहानी
बुरे वक्त में गिव अप करना,
दुशमन को कमजोर आंकना, यारो ये नादानी है,
तिलक,गोखले बहुत दे चुके,बाकी अपनी कुर्बानी है
बचपन बीता है अभी-अभी ,बाकी अभी जवानी है,
नसों में उबलता है खून मेरा,माथे से टपकता पानी है
किस्मत बदलेगी देश की यारो,हवा अभी वो  आनी है//////////////////
               राजन विघार्थी 
                06/04/17