शनिवार, 16 मई 2020

दिखावा किया-राजन विघार्थी

दोस्तो हम जिन्हें अपना समझते रहे
हर उस सक्स ने हमसे किनारा किया
पलकें बिछायीं अगवानी में जिसके
परे हटने का उसने इसारा किया
जान जिस पर लुटायी थी हमने
अनजान होने का उसने दिखावा किया
हर किसी की सामने
दोस्ती का हाथ बढ़ाया हमने
निराशा मिली तो पछतावा किया
तन्हा रहे जिन्दगी भर
पर खुश रहने का हमने दिखवा किया///
( राजन विघार्थी)

है मन्जिल अपनी मुट्ठी में-राजन विघार्थी

नहीं रुकेगें हम,तूफानों में चट्टानों में/
कौन सी ऐसी मुश्किल है,
फेर दे पानी अरमानों में/
ये हार है क्या ?,ये जीत है क्या है,
है जब मन्जिल अपनी मुट्ठी में/
परवाह नहीं सुख-दुख की,
हैं जब खुशियाँ अपनी मुट्ठी में/
जज्बात हैं अपनी मुट्ठी,
हर बात है अपनी मुट्ठी में/
है धरती अपनी मुट्ठी में,
आसमान है अपनी मुट्ठी में/
कन्डीसन हम बदलेगें,
है दुनिया अपनी मुट्ठी में/
सारे जहाँ से प्यार है हमको,
पर दिल है अपनी मुट्ठी में/////
(राजन विघार्थी)dedicated to shivani gupta class fourth

प्यारी नानी-राजन विघार्थी

माँ से ज्यादा प्यारी नानी
माँ को भी हैं प्यारी नानी
नानी को भी प्यारी नानी
सबको प्यारी सबकी नानी
गर्मी की छु़ट्टी हुई तो याद आयी नानी
टीचर ने मारा तो याद आयी नानी
इक्जाम में याद आयी नानी,
काम में याद आयी नानी
पहलवान को याद आयी नानी,
भगवान को याद आयी नानी
जब-जब कोई आफत आयी ,
तब-तब याद आयी नानी
अफसोस जब इतनी अच्छी है नानी
तो गाली में क्यों याद आयी नानी
(रजन विघार्थी) dedicated to Upasna gupta class third kanpur nagar

उनके बगैर जीकर दिखायेंगे-राजन विघार्थी

कल जिन आंखो मे प्यार नजर आता था
आज उन आँखो में बरबादी नजर आतू है
कल जिन्दगी से बेइम्तहाँ मोहब्बत थी
आज मौत में आजादी नजर आती है
पर यूँ  मौत को गले लगायेंगे हम
उनके बगैर जीकर दिखायेंगे हम
कल उनके लिए नजरे बिछायीं थी हमने
अब किसी और के लिए नजरें बिछायेंगे हम
घर उन्होंने अपना उजाड़ा तो क्या
अब नयी दुनिया बसायेंगे हम
उनके बगैर जीकर दिखायेंगे हम
राजन विघार्थी

प्यार के चक्कर में गालिब लगा हुआ है-राजन विघार्थी

कुछ अपने लगे हुए हैं,कुछ गैर लगे हुए हैं/
इश्क तो ऐसा चक्कर है,जिसमें सबके सब लगे हुए हैं //
कोई आंशिक्ता लगा हुआ है,कोई पूर्णकालिक लगा हुआ है/
प्यार के चक्कर में आजकल,हर गालिब लगा हुआ है//
कोई हार गया इसमें,कोइ मैदान मार गया इसमें/
कोई मैदान छोड़ के भागा हुआ है/
वो ले रहा है मजे जो है हर गालिब लगा हुआ/
कुछ हाथ डुबोये बैठ् हैं,कुछ पैर डुबोये बैठे हैं
कुछ इश्क के समन्दर में,अपनी लुटिया डुबोये बैठे़ं हैं/
दिल की बात बाई (राजन विघार्थी

दर्शन जिन्दगी का-राजन विघार्थी

जब सब करि विधि हारे

फेल हुए सारे हथकण्डा

तब हनुमत बोले प्रभु राम  से

लई के हाथ बजावव डण्डा

जणज न मानत विनय से

जबरन  गाड़  देव तुम झण्डा

इक्कसवीं सदी मे सक्सेज का

यही एक अकेला फण्डा

भैंस उसीको मिलेगी 

घूंमेगा जो  ले कर डण्डा

कलयुग राजा और पृजा तुमहीं हो

यूज करौ तुम अपना फण्डा

कहि कवि काम की बात

छील रहो है बण्डा

वो शाकाहारी,अहिंसा का पुजारी है

सब लोग खाव चाहे मुर्गी और अण्डा

(राजन विघार्थी)
written-25/08/16

न आशायें खत्म हुई हैं-राजन विघार्थी

न आशायें खत्म हुई हैं,न आसमॉ खत्म हुआ है

न घोड़े मरे हैं,न मैदान खत्म हुए हैं

न दोस्त कम हुए हैं,न दुसमन खत्म हुए हैं

वक्त बदल गया है,

और मेरे लिए दुवायें खत्म हुईं/

रिस्ते बिखर रहे हैं,सपने टूट रहे हैं

दुसमनों से गिला नहीं,अब दोस्त छूट ऱहे हैं

दीवारों के सहारे,दीवारों पे मूत रहें हैं

कदम लड़-खड़ाये तो,अपने छूट रहे हैं

कारवाँ गुजर रहा है,हम पीछे छूट रहे हैं/

कारवाँ गुजर जायेगा,हम खुद को सम्भालेगें

सांसो मे फिर से तूफान भरेगें ,

सपनों को बटोरेगें,इक नई जान भरेगें

हाँ आज मौसम खराब है ,

परिंदे हैं फिर से उड़ान भरेगें/////

(राजन विघार्थी