सोमवार, 23 जनवरी 2023

तुम्हारा मौन

तुम्हारा मौन

सच
तुम्हारा मौन....सर्द. व बर्फीली  हवाओं सा चीरता....
अंदर तक झकझोरता है...
पर ये मौन कोई साधारण सा मौन नहीं  .......
ये मौन उसका मौन था.....
शायद मैं समझ नहीं पायी  उसके मौन का मतलब.......
पर वो इस बात से नाबाफिक है....
कि उसका मौन आहत कर जाता है...मेरे अन्तर्मन को ...
. मैं स्वयं से ही प्रश्न उत्तर करती 
 और स्वयं ही अन्तर्द्वन्द्व को झेलती हूं....
पर शायद...
 तुम मौन को ढाल बना कर बचना चाहते  हो...
और मैं जानबूझ कर फिर फिर इन्तजार करती हूं....
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे प्रहार का.....
पता नहीं क्यों तुम अनजान बन
सब कुछ तिरोहित करते हो
खामोशी से....
मौन रहकर....
....................

शायद वक्त के साथ अब मैं समझने लगी हूं 
और 
अब स्वीकारती हूं तुम्हारा मौन....
सिर्फ इसलिए ...
कि ये मौन..तुम्हारा है...
तुम से होकर आया है.....
 तुम्हारी हर वो चीज मुझे पसन्द है....
जो तुम से होकर गुजरती है....
इसलिए मै तुम्हारे मौन को......
स्वीकारती हूं.....
समर्पित भाव से......
पूर्णसमर्पित...भाव....से....

#  नीलम गुप्ता. " नीरा "

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