शनिवार, 5 नवंबर 2022

नफा नुकसान

नफा नुकसान

रविवार का दिन था.... ऑफिस की छुट्टी थी.... फिर नवंबर में हल्की सर्दी भी होने लगी थी... मैं आराम से बिस्तर पर बैठ कर फुर्सत में अखबार पढ़ रहा था... साथ में पत्नी चाय देकर गई थी वह मैं पी रहा था..... वैसे तो फुर्सत ही कहां मिलती है.... सुबह उठो तैयार होओ... बच्चों को स्कूल छोड़ो और ऑफिस जाओ...... बच्चों का स्कूल ऑफिस के रास्ते में ही पड़ता था...... इसलिए उनको छोड़ता हुआ ऑफिस निकल जाता हूं.... यही क्रम पूरे हफ्ते चलता है..... संडे के अतिरिक्त किसी भी दिन फुर्सत नहीं मिलती इसलिए सारे  काम संडे को ही फुर्सत में होते हैं...।
      अभी चाय की चुस्की ली ही थी कि.....डोर बेल बजी मैं अलसाया सा नहीं उठा ....सोचा पत्नी ही दरवाजा खोल देगी.... शायद पत्नी किसी काम में व्यस्त थी ....या फिर उसने डोरबेल नहीं सुनी .....तभी दोबारा डोर बेल बजी तो मैं अपने आप से बोला...... कौन है भाई इतनी सुबह सुबह संडे के दिन तो फुर्सत से रहने दो....।
 मैंने  अनमने मन से उठकर..... जैसे ही दरवाजा खोला.....सामने  एक स्मार्ट सा युवक खड़ा था.... मैं अभी उसे ऊपर से नीचे तक निहार ही रहा था.... तभी उसने बड़ी शालीनता भरे अंदाज से कहा.... नमस्ते अंकल जी और मेरे पैर छुए......मैंने भी प्रत्युत्तर में नमस्ते बेटा कहा .....पर मैं असमंजस में था और पहचानने की कोशिश कर रहा था...... कि इतना अदबदार शालीन युवक कौन है ......मेरे दिमाग की घड़ी वक्त से भी तेज चल रही थी उस वक्त.....मैं पहचानने की कोशिश कर ही रहा था पर असफल ही रहा....
          शायद वह मेरी मन: स्थिति समझ गया था .....बोला.... अंकल जी आपने शायद मुझे पहचाना नहीं ....... मैं कुछ झेंप सा गया ......जैसे कि मेरी चोरी पकड़ी गई हो.....मैंने जल्दी से कहा पहले अंदर आओ ....तब बात करते हैं..... वह बिना कुछ बोले मेरे पीछे पीछे ड्राइंग रूम में आ गया ......मैंने बैठने का इशारा किया तो ..... वो बैठ गया..... इतने में पत्नी भी अंदर से कौन है ....??   कहते हुए आ गई ......साथ ही पानी का गिलास  भी लाई...।
      वह युवक सोफे पर बैठ गया और ड्राइंग रूम का उड़ती नजर से मुआयना करने लगा और मैं उसका......वो शायद सोच रहा हो कहां से बात शुरू करे....     मैं कुछ कहता  इससे पहले ही वो बोल पड़ा .....लगता है अंकल जी  आपने मुझे पहचाना नहीं..... मैंने कुछ झेंपते हुए कहा..... शायद उम्र हो हो चली है मेरी .....इसलिए याददाश्त साथ नहीं दे रही..... युवक सधी हुई आवाज में बोला .....मैं वही हूं..... जो अपने पापा के साथ आया था..... 5 साल पहले आपका स्कूटर लेने के लिए आया था तब हमारे पास पैसे कम थे ...लेकिन आपने अपना स्कूटर हमारी मजबूरी समझते हुए हमें ....... नुकसान में बेच दिया ......और साथ ही मिठाई और पेट्रोल के  ₹500 भी दिए..... वह युवक धाराप्रवाह बोले जा रहा था .....उस दिन बहुत दिनों बाद हमने खरीद कर मिठाई खाई थी....... मैंने तभी सोच लिया था कि कुछ बन जाने पर आप जैसे देवता आदमी से मिलने जरूर आऊंगा .....
          आपके स्कूटर ने मेरी  क्या पूरे परिवार की स्थिति ही बदल डाली ......आपको पता है..... अंकल जी वह स्कूटर आज भी मेरे घर पर है .....आपसे स्कूटर लेकर मेरा आने जाने का समय बच जाता था..... तब मैंने ट्यूशन पढ़ाने शुरू कर दीए.....जिससे पापा को कुछ मदद मिल जाए..... फिर मैंने बीटेक ऑनर्स में पास किया...... 1 साल छोटी मोटी नौकरी की साथ ही ट्यूशन भी पढ़ाता रहा .....घर की स्थिति सुधरने लगी थी..... फिर पुणे की एक कंपनी में अच्छी जॉब मिल गई ......आज जैसे ही मैं घर आया ......तो आपसे मिलने चला आया ...।   आपको कुछ देने लायक तो नहीं हूं पर आपके एहसान का बदला कभी भी नहीं चुका सकता...... मैं दिल से आपका शुक्रिया करता हूं...... सच में आपके स्कूटर ने हमारी जिंदगी बदल दी .....वह लगातार एक सुर में बोलता ही जा रहा था .....और.... मैं ....कभी पत्नी को कभी उस युवक को देख रहा था...... मेरे पास कुछ शब्द भी नहीं ही नहीं थे...... मैं सिर्फ इतना ही बोल पाया ......बेटा नफा नुकसान तो चलता ही रहता है .....उस वक्त मुझे लगा तुमको स्कूटर की ज्यादा जरूरत है...... तभी मेरी पत्नी चाय ले आई बोली...... बेटा नाश्ता करोगे ......उसने केवल चाय पी और फिर से धन्यवाद कहते हुए  मेरे और पत्नी के पैर छू कर चला गया.....।
 मैं वहीं सोफे पर धंसा रहा .....मेरे सामने आज से 5 साल पहले का  पूरा घटनाक्रम घूम गया ..... स्कूटर पुराना हो गया था..... घर में बेकार पड़ा था सो  OLX  में   30,000  पर डाल दिया ......बहुत से कॉल आए 27000 , 25000 , 24000 , 28000 के .....बस एक कॉल आया 29000 का ..... मैंने मन बना लिया कि 29000 में बेच ही दूंगा.....।
     अगले दिन सुबह एक कॉल आई....साहब आपने OLX  पर स्कूटर के लिए डाला है..... मैंने संचित सा जवाब दिया .....हां
   उधर से एक दबी सी आवाज आई साहब मैं जोड़ तोड़ कर  ₹24000  ही कर पाऊंगा  ....जो कम पड़ेंगे तो मैं कहीं से इंतजाम कर लूंगा ......अगर संभव हो तो वह स्कूटर मुझे ही देना.....  मेरे बेटे को बहुत जरूरत है .....उसका समय बच जाएगा साहब..... वह पढ़ाई में बहुत अच्छा है....।
            मुझे  लगा जैसे सच में उसको जरूरत हो .....उसकी आवाज में कुछ ऐसी मजबूरी की कसक थी कि..... लगा जैसे सच में उसको जरूरत है ....मैंने कहा...... ठीक है तुम कल आ जाओ....।
      फिर शाम को दो तीन बार उसका फिर कॉल आया साहब.... कल जरूर आऊंगा.... पैसों का इंतजाम कल तक हो ही जाएगा..... कल दूसरा शनिवार था मेरी छुट्टी भी थी ...।
         वह शायद रात को सो भी नहीं पाया होगा..... सुबह 10:00 बजे ही आ गया .....अपने बेटे के साथ ....हाथ जोड़कर खड़ा था....उसने  कहा ....साहब बड़ी मुश्किल से इंतजाम हो पाया ... और नोट मेरे हाथ में थमा दिए
फिर मुझसे बोला .....साहब गिन लीजिए ...... उनमें मुड़े पुराने ...500 के , 100  और 50  के बहुत से नोट थे...... मैं समझ गया उसने कैसे इंतजाम किया होगा ....मैंने कहा.... तुमने गिन लिए तो पूरे ही होंगे.... उसका बेटा हाथ से स्कूटर साफ कर रहा था.... उसकी आंखों में चमक थी ..... उस वक्त मुझे लगा कुछ नुकसान तो हुआ पर किसी का भला हो गया...... वास्तव में ये जरूर मंद है .....हाथ जोड़कर बार-बार धन्यवाद देते हुए .....वह जैसे ही जाने के लिए मुड़ा..... मैंने उसको आवाज दी.... और ....पांच सौ का नोट देते  हुए मैं बोला...... घर जा रहे हो तो.... बच्चों के लिए मिठाई लेते जाना और हां जरूरत पड़े तो पेट्रोल भी डलवा लेना .....मिठाई और पेट्रोल दोनों इसमें आ जाएंगे....।
             उसके जाने के बाद मैंने सोचा..... मुझे नुकसान तो ज्यादा नहीं हुआ .....पर अगर किसी का भला हो जाए तो क्या बुराई है..... मेरा स्कूटर किसी के काम आए इससे ज्यादा और क्या चाहिए .....नफा नुकसान तो चलता ही रहता है....।
          मेरी तंद्रा तब टूटी जब..... पत्नी ने आकर कहा.... देखिए 12:00 बज रहे हैं फटाफट नहा कर आइए.... मैं नाश्ता लगाती हूं .....और मैं.... पत्नी के आदेशानुसार प्रसन्न मन से नहाने चला गया....।

 # Dr नीलम गुप्ता  "नीरा"

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