मंगलवार, 20 सितंबर 2022

इक पाती तेरे नाम

आज वर्षों बाद ...
मै फिर से लिखने बैठी "इक पाती तेरे नाम"
 वो तेरी यादें...
 वो तेरी बातें 
 वो सुनहरी धूप 
 वो शीतल छांव 
 वो मंद बयार 
वो उन्मुक्त हंसी
वो  नीला आसमान
कुछ भी तो नहीं बदला....
..............

सब कुछ आज फिर से  जीवंत सा हो उठा....
एक अंतराल बाद जब तुम मिले 
तब समझ आया कि ...
वो ख्वाब जो बचपन में सखी सहेलियों संग साझा किए थे....
कि....
 आएगा सफेद घोड़े में एक राजकुमार
 मेरे सपनों को जो देगा नई उड़ान 
 कराएगा मुझे वो सैर परियों के देश की
वो तुम हो...
...............

सच में.... 
 वो राजकुमार तो किस्से कहानियों का था...
पर हकीकत में ....
स्नेह, सम्मान ,परवाह और  अनकहे मनोभावों को जो पढ़े
 वही तो राजकुमार है....सफेद घोड़े वाला 
.............

सुनो ...
मन करता है अब ....
फिर से लौट जाऊं ... उन हंसी पलों में....
फिर से अठखेलियां करूं....
 झूमूं खुले आसमान तले....

.............

तुम संग फिर से....
ख्याबों में फिर से रंग भरने लगी मैं....
जीने लगी उन लम्हों को  एक बार फिर से....
बस....
लापरवाह सी मैं....
सपनों के पन्नों में ख्यावों की स्याही से ....
लिखने बैठी ....आज फिर से..
"इक पाती तेरे नाम "

Dr नीलम गुप्ता। " नीरा "


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