शनिवार, 28 मई 2022

संजीवनी बूटी

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जी हाँ जरुरत होती है....उम्र पर
संजीवनी बूटी की सभी को.....

जहाँ बंद हो जाते हैं सारे रास्ते....
और..
  खड़ी हो जाती है जिन्दगी एक ऐसे दोराहे पर
जब....
 ये जानी पहचानी गलियां लगती हैं बेगानी सी
फिर.....
 जिन्दगी के सफर में सिर्फ तलाश रहती है
इक अदद सुकून की...
और.....
तब मिल जाते हैं ... कुछ दोस्त खड़े हुए 
उम्मीद से अपनी बाँहे फैलाये.... 
मीठी मुस्कान लिए... थामने को डगमगाते हुए कदम
वही दोस्त.....
जो खोल देते हैं जिन्दगी का वो रास्ता 
जहाँ फिर से शुरू होता है एक नया सफर ....
  सच कहा....
नया सफर नया रास्ता बेफिक्री का बेपरवाह सा...अलबेला
और फिर....
 फिर से शुरू हो जाती है जिन्दगी की नई पारी....
दोस्तों संग ...
जहाँ सारे रिश्ते नाते ताक पर रख ....
फिर से जी लेते हैं हम जिन्दगी की अनूठी पारी
और फिर....
चल पड़ती है जिन्दगी.... 
चुलबुले नटखट और शरारती दोस्तों संग ...
अनजानी राह पर....
 सच कहूँ तो....
दोस्त सजीवनी बूटी होते हैं.....
जो जिंदादिली से जीना सिखाते हैं...☺️

 एक बात और कहूँगी दोस्तों....
दोस्तों में कोई उम्र नही होती ...
जब दोस्ती होती है तो सब हमउम्र हो जाते हैं....
अभी तो संजीवनी बूटी होते हैं ये ....
बिंदास दोस्त

# डॉ नीलम गुप्ता "नीरा"

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