एक मुलाकात मेरी ...मेरी माँ से
जब मैं थी उदर में माँ के ...वो अपने से ज्यादा रखती ख्याल मेरा
जरा सी अकुलाहट पर मेरी ..वो विचलित हो जाती
😭😭😭
थोड़ा सा बड़ी हुई... पहचान भूख को मेरी झटपट सीने से लगा मेरी भूख मिटाती
पता नही कैसे मेरीे ...उंगली पकड़ चलना सिखायामेरे नन्हे पैरों को सम्बल दे आगे बढ़ना सिखायाना जाने कब खेल खेल में क ख़ ग का परिचय करवायामै नादान अल्हड़ सी..बिन बात रुठ जाती..याद है मुझे आज भी..पर फिर भी वो झट मनुहार कर चूम लेती पलकों को मेरीजान भी नहीं पाई मैं ...कब मुझे अच्छे बुरे का भेद करना सिखायाबातों ही बातों में चुपके से थमा दी मुझे संस्कारों की गठरीवो माँ ही थी..जिसने एक पल भी अलग ना किया मुझे अपने सेफिर भी रख सीने पर पत्थर ...
😭😭😭
झट से सौंप दी अनजाने हाथों में मेरे जीवन की डोर ..
वहाँ भी हरपल साया बन साथ निभाती रही मेरा
जब आया समझ तब छोड़ चली वो साथ मेरा...
पता नहीं वो कैसी जादूगरनी थी...बिन कहे समझ जाती थी मुझे...
🙏🙏🙏
ढूंढ लेती वो मेरी मुस्कान में भी ...हल्की सी उदासी की धूमिल रेखा
वो माँ हरपल यादों में रहती है मेरे हमसाया बन
माँ अब तू ही बता कैसे याद करूँ तुझको ..
एक दिन में..
मेरे लिए तो हर रोज... हर पल तू ही तू है..कदम कदम पर तेरी बातें...तेरी सलाहें.. थाम लेती हैं..मेरे डगमगाए कदमों को...आज भीसच माँ ..मैं माँ बन कर भी... तुझको पल पल याद करती हूँ..बन्द आखों के नम कोरों से तुझको बारम्बार नमन करती हूँ
😭😭😭
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