सोमवार, 25 मई 2020

शून्य से टकरा कर सुकुमार-महादेवी वर्मा

Google celebrates Jnanpith awardee Mahadevi Varma
शून्य से टकरा कर सुकुमार
 करेगी पीड़ा हाहाकार,
बिखर कर कन कन में हो व्याप्त
 मेघ बन छा लेगी संसार!

पिघलते होंगे यह नक्षत्र
 अनिल की जब छू कर नि:श्वास
 निशा के आँसू में प्रतिबिम्ब
 देख निज काँपेगा आकाश!
Great Women of India - Other Great Women Subhadra Kumari Chauhan

             विश्व होगा पीड़ा का राग
          निराशा जब होगी वरदान
       साथ ले कर मुरझाई साध
  बिखर जायेंगे प्यासे प्राण!

                उदधि नभ को कर लेगा प्यार
                मिलेंगे सीमा और अनंत
                  उपासक ही होगा आराध्य
                  एक होंगे पतझड वसंत!

बुझेगा जल कर आशा-दीप
 सुला देगा आकर उन्माद,
कहाँ कब देखा था वह देश?
अतल में डूबेगी यह याद!

                  प्रतीक्षा में मतवाले नयन
                      उड़ेंगे जब सौरभ के साथ,
                        हृदय होगा नीरव आह्वान
                              मिलोगे क्या तब हे अज्ञात
Google Dedicates Google Doodle to Hindi Poet Mahadevi Varma ...
                                              महादेवी वर्मा 

उर तिमिरमय घर तिमिरमय-महादेवी वर्मा

About The Mahadevi Verma - Maha Dev - Medium
                    उर तिमिरमय घर तिमिरमय,
                चल सजनि दीपक बार ले!

               राह में रो रो गये हैं,
          रात और विहान तेरे,
          काँच से टूटे पड़े यह,
             स्वप्न, भूलें, मान तेरे;
           फूलप्रिय पथ शूलमय,
         पलकें बिछा सुकुमार ले!
Mahadevi Verma (27 April 1907-11... - Multiple Action Research ...
तृषित जीवन में घिर घन-
 ; उड़े जो श्वास उर से;
     पलक-सीपी में हुए मुक्ता
       सुकोमल और बरसे;
           मिट रहे नित धूलि में
                   तू गूँथ इनका हार ले !

               मिलन बेला में अलस तू
                सो गयी कुछ जाग कर जब,
Mahadevi Verma: A Feminist Writer And Humanitarian ...
महादेवी वर्मा 

रविवार, 24 मई 2020

अश्रु यह पानी नहीं है-महादेवी वर्मा

Rebel with a cause - The Hindu
अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है!
                                         यह न समझो देव पूजा के सजीले उपकरण ये,
              यह न मानो अमरता से माँगने आए शरण ये,
                                                  स्वाति को खोजा नहीं है औ' न सीपी को पुकारा,
                                                                मेघ से माँगा न जल, इनको न भाया सिंधु खारा!
                        शुभ्र मानस से छलक आए तरल ये ज्वाल मोती,

प्राण की निधियाँ अमोलक बेचने का धन नहीं है।

 अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है!

महादेवी और संस्मरणात्मक रेखाचित्र ...    
महादेवी वर्मा 

रविवार, 17 मई 2020

मेरी माँ-राजन

मुकम्मल मेरा जहाँ है माँ

Maa Baap Ka Pyar Mother Father Love Quotes in Hindi Images  ma ka pyar 😘😘😘😘😘 Images akash kumar - ShareChat - भारत ...                             

यहाँ है माँ,वहाँ है माँ
छोटी सी है दुनिया
सारा जहाँ है माँ
बच्चे को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी ...MAA KA PYAR -
जहां  हूँ मैं वहाँ है माँ
बेटे की हर सांस पर रवां है माँ////
कांपते हैं हाथ,वृध्द है माँ
बेटे को बचाने कोहो जाती जवां है माँ
चित्र में ये शामिल हो सकता है: 4 लोग
अकेला होता हूँ जब,मेरे पीछे
बन खड़ी होती,कारवां है माँ
जब तक सलामत है बेटा
सलामत है माँ
चित्र में ये शामिल हो सकता है: 4 लोग
कभी दिखती है,कभी दिखती नहीं
पर आस- पास ही है मेरी माँ////////

         राजन
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
         15/04/17

उठो भइया उठो............(राजन विघार्थी)

         ए हाथ में एक कटोरी,ज्यों ही घुमायी उसने ठोढ़ी
हाथ किसी का उठ गया,वो भी खुशी से मुङ गया इससे पहले मुङ भी पाता ,तेजी से गिर गया
तेजी से फिर बोले साहब,ये तो साला मर गया  

अभी दिन नहीं अच्छे, प्रदेश में ...
हाथ एक न पैसा आया,बदले में थप्पड़ खाया

हाथ बढ़ा था अबभी उसका,पर अब होश नहीं था भीड़ खड़ी थी बहुत सी सारी ,
पर किसीको रोष नही था/

देश में 4 लाख से अधिक भिखारी, जानिए ...
इनसानियत ने अपना मुंह खोला
बड़ी सिद्दत से एक नवयुवक बोला
यह कल मरने वाली बुढ़िया का लाला था                                                             
थप्पड़ जिसने मारा मन्त्री जी का साला था
एक गरीबी उन्मूलन जलसे पे जा रहे हैं
सुना है कल लालपुर में,
गरीबों को खिचड़ी बटवा रहे हैं/
बिखरे पड़े थे उसके सिक्के
एक-एक,दो-दो के इक्के-दुक्के
भीड़ हट चुकी थी,कटोरी अब भी पड़ी थी
लड़का वहीं पड़ा था
पास में उससे भी छोटी लड़की खड़ी थी
सिसकीयों के साथ उठो भइया उठो......

कह रही थी//////////
राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
                                                         



शनिवार, 16 मई 2020

अच्छ सा पैगाम आये-राजन विघार्थी

हर कोई चाहता है ,अच्छा सा पैगाम आये
दो पल जिन्दगी में आराम आये
धूप जाये छाँव आये
दिल की बात दिलावर मान जाये
किसान भी चाहता है
बाजरे के अच्छे दाम आयें
तो खूबियां बताओ ऎसे
बाजरा भी किसी काम आये/
               वो चाहता है सबकी मान जाये
           पर सबका मकसद तो उसकी जान आये
           वो मरना भी चाहता है 
          इससे पहले की अमरनाथ पहलगाम जाये
         पर मौत भी तो किसी के काम आये 
         पर मौत भी तो किसी के काम आये  
         बदनाम हो तो हो जाये 
        यदि बदनामी से मोहबब्त मिल जाये
          
राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
Written-06- 06-13

शीशे मे उतार के देखा-राजन विघार्थी

मैंने खुद को शीशे में उतार के देखा
मौत से पहले खुद को मार कर देखा
एकबार नहीं,हजार बार बिचार के देखा
शीशे के पार कुछ मिलता नही हैं
मौत के पार कोई टिकता नही है
फिरभी शीशे के पार खूबसूरती ढूँढते हैं
मौत के बाद सुकून की मूरती ढूँढते 
शीशे कब टूटे पता नहीं है
जिन्दगी कब रूठे पता नहीं है
शीशे में बस किसी की सूरत दिखा सकते हैं
मौत की झुँठी शुभ मुहरत बता सकते हैं
मिल जाये जिन्दगी का यतार्थ तो 
मौत को जिन्दगी से भी खूबसूरत बना सकते हैं////
 राजन विघार्थी
चित्र में ये शामिल हो सकता है: Pradip Kumar Gupta, वह संभावित टेक्स्ट जिसमें '2018-12-11-16:35' लिखा गया है
Written-06-08-13