शनिवार, 16 मई 2020

प्यार करें-राजन विघार्थी

1...बहुत हुआ ये तनहा जीवन
आओ हम प्यार करें
खड़े होकर इक चौराहे पर
हर आते- जाते से इजहार करें
कोई नहीं जहां पे अपना,
किसी के आने का इन्तजार करें
आओ हम प्यार करें////
राजन विघार्थी
15/03/18

भूला नहीं हूँ-राजन विघार्थी

भूला नहीं हूं ,सबकुछ याद है
सांय- सांय गूंजता है, सन्नाटा कानों में
कुछ और नही है ,तुमको मेरी आवाज है
अंधेला छाया हमारी आंखो में है
पर उजाला अभी याद है
सुन तो सही ध्यान से 
सन्नाटा मेरी आवाज है/
राजन विघार्थी
4/11/17

मौत का गुरूर तोड़ दें-राजन

1...हंसकर गुजार लें दो पल
       आगे देखेगें 
जो हमपे बीतेगी
मौत से जंग है
कुछ बाजी जिन्दगी  भी जीतेगी
    कुछ सबक मौत को सिखायेंगें
कुछ सबक जिन्दगी भी सीखेगी
       आगे देखेंगें 
जो हमपे बीतेगी,///////
2..हार के डरसे क्यों युध्द छोड़ दें
    संघर्ष सनातन धर्म है मनुष्य का
   तो क्यो कर्तव्य पथ  छोड़ दें
        हर बार न सही
आओ दो - चार बार 
                मौत का गुरूर तोड़ दें
    संघर्ष है सार जिन्दगी का
तो फिर क्यों संघर्ष पथ छोड़ दें
आओ दो- चार बार 
                 मौत का गुरूर तोड़//////
3.. सहज नही हैं जीवन जीना
            नीर छोड़ अस्रु को पीना
   हो गया भले ही छलनी सीना
                 खड़े हुए हैं ताने सीना
         कठिन बहुत है
          ऐसा करने का जज्बा तो है
दावेदारी बहुत मजबूत है मौतकी
           पर अभी जिन्दगी का कब्जा तो है/////
     
राजन विघार्थी

    12/12/17

सच सुनकर लोग तिलमिलाते क्यों है- राजन विघार्थी

1..लोग खुदको खुदा समझते हैं 
तो सजदे पे जाते क्यों हैं?
गम आगर है इस कदर जिन्दगी में 
तो लोग मुसकुराते क्यों हैं?
खुशियां आनी हैं हर किसी के दामन में 
तो लोग आंसू बहाते क्यों हैं ?
       
  2.कई- कई चेहरे हैं हर शक्सियत के 
       एक के सिवा बाकीको लोग छुपाते क्यों हैं?
         लोग कहते हैं धोखा उनकी फितरत नहीं 
         फिर सतरंज की गोटियां बिछाते क्यों हैं ?
      सफेद के साथ ईक काला चेहरा भी है
हम सब उस काले चेहरे को छुपाते क्यों?
3.यदि पीठ मे खंजर ही घोपना है
तो लोग सीने से लगाते क्यों हैं?
मजहब नही होता है आतंकवाद कोई,
तो लोग धर्म के नाम पर लाशे बिछाते क्यों हैं?
4. हम जमीं से आसमां तक,चांद से मंगल यान   तक पहुंचे
     तो कुपोषित कदम जवानी के डगमगाते क्यों हैं?
       दुनिया विकास के शिखर पर है
          तो बच्चे भूंख से बिलबिलाते क्यों हैं?
             तो बच्चे भूख से बिलबिलाते क्यों है़?
               सच के लिए ही परेसान है दुनिया
      तो सच सुनकर लोग तिलमिलात क्यों हैं////
   
मासूम कवी
                    
                       राजन विघीर्थी
                   17/09/17
  
  

कलम संभालू य तलवार उठाऊं -राजन विघार्थी

1...अजीब कश-म कश में हूँ
अधर में है जिन्दगी 
बहुत असमंजस में हूँ
मुंह छुपाऊँ य कुछ करके दिखाऊँ
खुद को संभालूं य लड़कर दिखाऊं
कलम संभालूं य तलवार उठाऊं
कांटे हटाऊं य चलकर दिखऊँ////
2....मेरी किस्मत हि यारो सबसे जुदा है
मेरे सामने खुदा है,मेरे पीछे खुदा है
लेफ्ट मे खुदा है,राईट में खुदा है
जाऊँ किधर ,हर तरफ खुदा है
बेचैन नजरें ढूढती हैं-
जाके कहां छिप गया खुदा है///
       
              राजन विघार्थी

गम कुछ ज्यादा रहा-राजन विघार्थी

1..वैसे तो
हर समस्या से जूझने का वादा रहा
कुछ किस्मत का ऐसा तगादा रहा
           जिन्दगी में
खुशियों की अपेक्छा गम कुछ ज्यादा रहा,/
2.वैसे तो जबभी गिरे सम्भलते रहे
संभल -२ मन्जिल की ओर चलते रहे
पैर व रास्तों का मेल रहा ऐसा की
हर मोड़ पर हम फिसलते रहे
हम प्यासे भटकते रहे कुए़ की तलाश में
लोग थे की बेवजह हमसे जलते रहे
भूखे -प्यासे कांपते कदमों से,
हम पथ पर अपने चलते रहे-चलते रहे चल ते,////

हकीकत है य सपना-राजन विघार्थी

दर्द अपना है
मलहम भी अपना है
लड़खड़ाया कदम भी अपना है
सम्भलने की कोशिश अपनी है
जिसने लात मारी अपना है
जड.भी अपनी है
चैतन्य भी अपना है
ये सब हकीकत है य सपना है///
राजन विघार्थी
12/08/17