शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

खग ! उडते रहना जीवन भर!--गोपालदास नीरज

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खग ! उडते रहना जीवन भर!
भूल गया है तू अपना पथ,
और नहीं पंखों में भी गति,
किंतु लौटना पीछे पथ पर अरे, मौत से भी है बदतर।
 खग ! उडते रहना जीवन भर!
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मत डर प्रलय झकोरों से तू,
बढ़ आशा हलकोरों से तू,
क्षण में यह अरि-दल मिट जायेगा तेरे पंखों से पिस कर।
 खग ! उडते रहना जीवन भर !

यदि तू लौट पडेगा थक कर,
अंधड़ काल बवंडर से डर,
प्यार तुझे करने वाले ही देखेंगे तुझको हँस-हँस कर।
 खग ! उडते रेहना जीवन भर !

और मिट गया चलते चलते,
मंजिल पथ तय करते करते,
तेरी खाक चढाएगा जग उन्नत भाल और आखों पर।
 खग ! उडते रहना जीवन भर !
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                                                                     -गोपालदास नीरज 

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