बुधवार, 29 अप्रैल 2020

राही चल अकेला-प्रदीप

चल अकेला चल अकेला चल अकेला 
 तेरा मेल पीछे छूटा राही चल अकेला 
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 हजारों मील लम्बे रस्ते तुझको बुलाते 
 यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते 
 है कौन सा वो इन्सान यहाँ पे
 जिसने दुःख ना झेला 
 चल अकेला चल अकेला चल अकेला...

तेरा कोई साथ न दे तो Image result for kavi pradeep
 तू खुद से प्रीत जोड़ ले 
 बिचौना धरती को करके 
 अरे आकाश ओढ़ ले 
 पूरा खेल अभी जीवन का
 तूने कहाँ है खेला 
 चल अकेला चल अकेला चल अकेला
 तेरा मेल पीछे छूटा राही चल अकेला
      Image result for kavi pradeepकविवर प्रदीप

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