शनिवार, 16 मई 2020

छोड़ कर चली गयी-राजन विघार्थी

लोग समझे ही कहाँ मेरे जज्बातों को

बुरा मान बैठे मेरी बातों को

नींद खराब कर दी मेरी

और हाथ पैर तोड़ दिए रातों को/

    व्याख्या

उसकी भी आस छोड़ कर चली गयी/

जिसके लिए पब्लिक

भौं फोड़,नाक तोड़ कर चली गयी/

हम पकड़ ही कहाँ पाये,

वो बाँह छोड़ कर चली गयी/

शादी कर ली उसने

मुझे बरबाद कर चली गयी/

खुद को बेगुनाह बताया उसने

मेरे मुँह मे बदनामी ठूँस कर चली गयी/

मेरी ही गलती थी,मैंने बरगलाया था उसे

ऐसा ब्लेम कर चली गयी/

सालों तक लूटा हमींको

और मानहानि का क्लेम कर चली गयी/

बचपना था जो बहक गयी थी वो

हम क्या बुढ़ापे मे बहके थे

जो छोड़ कर चली गयी/

     

 (राजन विघार्थी) 

written-23/08/16

शनिवार, 2 मई 2020

खुला आसमान-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

INDIA 1976 SURYAKANT TRIPATHI NIRALA 1896-1961 MNH SINGLE STAMP ...
बहुत दिनों बाद खुला आसमान!
निकली है धूप, खुश हुआ जहान!
दिखी दिशाएँ, झलके पेड़,
चरने को चले ढोर--गाय-भैंस-भेड़,
खेलने लगे लड़के छेड़-छेड़--
लड़कियाँ घरों को कर भासमान!सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता ...
लोग गाँव-गाँव को चले,
कोई बाजार, कोई बरगद के पेड़ के तले
जाँघिया-लँगोटा ले, सँभले,
तगड़े-तगड़े सीधे नौजवान!
पनघट में बड़ी भीड़ हो रही,
नहीं ख्याल आज कि भीगेगी चूनरी,
बातें करती हैं वे सब खड़ी,
चलते हैं नयनों के सधे बाण!
निराला रचनावली 6 | Nirala Rachnawali ...

गीत गाने दो मुझे-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’


अब वेदना किससे कहूं – Arvind Pandey
गीत गाने दो मुझे तो,
वेदना को रोकने को।
Book review: The Outsider Inside | Lifestyle News,The Indian Express
चोट खाकर राह चलते
होश के भी होश छूटे,
हाथ जो पाथेय थे, ठग-
ठाकुरों ने रात लूटे,
सनातन मूल्यों और राष्ट्रवादी ...
कंठ रूकता जा रहा है,
आ रहा है काल देखो।
भर गया है ज़हर से
संसार जैसे हार खाकर,
Best Poems Of Suryakant Tripathi | Hindi Kahani | Kids Poetry In Hindi
देखते हैं लोग लोगों को,
सही परिचय न पाकर,
बुझ गई है लौ पृथा की,
जल उठो फिर सींचने को।
दुष्कर्म से पीड़ित नौ माह की गुड़िया ...

रामधारी सिंह दिनकर-कलम आज उनकी जय

कलम, आज उनकी जय बोल
जला अस्थियाँ बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल
कलम, आज उनकी जय बोल.
जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल
कलम, आज उनकी जय बोल.
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम, आज उनकी जय बोल.
अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल
कलम, आज उनकी जय बोल.

भिक्षुक -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

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वह आता--
दो टूक कलेजे के करता पछताता
पथ पर आता।
पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी भर दाने को-- भूख मिटाने को
मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता--
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।
साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाये,
बायें से वे मलते हुए पेट को चलते,
और दाहिना दया दृष्टि-पाने की ओर बढ़ाये।
भूख से सूख ओठ जब जाते
दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते?--
घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते।
चाट रहे जूठी पत्तल वे सभी सड़क पर खड़े हुए,
और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए!
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अभी न होगा मेरा अन्त

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अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसन्त
अभी न होगा मेरा अन्त।
हरे-हरे ये पात
डालियाँ, कलियाँ कोमल गात!
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूंगा निद्रित कलियों पर
महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ...
जगा एक प्रत्यूष मनोहर
पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूंगा मैं
अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं
द्वार दिखा दूंगा फिर उनको
है मेरे वे जहाँ अनन्त
अभी न होगा मेरा अन्त।
मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण
इसमें कहाँ मृत्यु?
है जीवन ही जीवन
अभी पड़ा है आगे सारा यौवन
स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक-मन
मेरे ही अविकसित राग से
विकसित होगा बन्धु, दिगन्त
अभी न होगा मेरा अन्त।

सुनो द्रोपदी -पुष्यमित्र उपाध्याय

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ...
छोड़ो मेहँदी खडग संभालो, खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे.
उठो द्रोपदी - कविता, Utho Dropadi Hindi Poems ...
कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए अखबारों से,
कैसी रक्षा मांग रही हो, दुशासन दरबारों से,
स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं, वे क्या लाज बचायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे.
सवाल आपसे ! क्या अब भी द्रौपदी की ...
कल तक केवल अँधा राजा, अब गूंगा बहरा भी है
होठ सी दिए हैं जनता के, कानों पर पहरा भी है,
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे, किसको क्या समझायेंगे?
SANJAY YADAV AMETHI's tweet - "उठो द्रौपदी वस्त्र ...उठो द्रोपदी वस्त्र संभालो अब ...
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे.
पुष्यमित्र उपाध्याय]